विदेश की खबरें | कोरोना वायरस के कारण सुरक्षा परिषद के सुधार पर अंतरसरकारी वार्ता प्रक्रिया सुस्त: महासभा अध्यक्ष

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधारों पर अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि कई विचार-विमर्श "कठिन" हैं और कोविड-19 महामारी के कारण भौतिक उपस्थिति वाली बैठकों के आयोजन नहीं होने से यह प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।

संयुक्त राष्ट्र, नौ जून संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधारों पर अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि कई विचार-विमर्श "कठिन" हैं और कोविड-19 महामारी के कारण भौतिक उपस्थिति वाली बैठकों के आयोजन नहीं होने से यह प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74 वें सत्र के अध्यक्ष तिज्जानी मुहम्मद बांदे ने संवाददाता सम्मेलन के दौरान सोमवार को यह बात कही । उनसे सुरक्षा परिषद में सुधार प्रक्रिया में देरी के बारे में पूछा गया था ।

यह भी पढ़े | OMG! चीनी शख्स के Bum में गलती से फंसी मरी हुई मछली, उसे निकालने के लिए डॉक्टरों को करनी पड़ी सर्जरी (Watch Graphic Video).

मुहम्मद बांदे ने कहा, 'हमारी अनौपचारिक वार्ता हुयी है । आईजीएन चल रहा है । इसमें कठिनाईं हो रही है क्योंकि कई वार्ता कठिन है और बहुत से लोग कठिन बातचीत आमने सामने बैठकर करना चाहते हैं । यह प्रक्रिया लंबे समय से सूची में है और इस वक्त यह और भी कठिन है।'

कोविड—19 के आलोक में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में होने वाली आमने सामने की बैठक निलंबित किये जाने के मद्देनजर उन्होंने कहा कि आभासी वार्ता 'बहुत कठिन' है लेकिन कोराना महामारी के कारण एक डीजिटल मंच पर बातचीत करने का प्रयास किया गया है।

यह भी पढ़े | Coronavirus in Pakistan: पाक सुप्रीम कोर्ट की इमरान सरकार को फटकार, कहा- कोरोनावायरस को गंभीरता से ले.

उन्होंने कहा, 'सुरक्षा परिषद के सुधार संबंधी अंतर सरकारी वार्ता जारी है । मौजूदा कठिनाईयों के कारण इसमें देरी हुयी है क्योंकि आमने सामने की बैठक संभव नहीं है ।'

भारत 15 देशों वाली सुरक्षा परिषद के सुधारों की वकालत करने में सबसे आगे रहा है। भारत इस बात पर जोर देता रहा है कि 21 वीं सदी में शांति और सुरक्षा की चुनौतियों का सामना करने के उद्देश्य से "पुरानी पड़ चुकी" वैश्विक शासन संरचना फिट नहीं हो सकती है ।

सुरक्षा परिषद के सुधार की समय सीमा के बारे में पूछे गये एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अब तक अनौपचारिक अथवा अपौचारिक बातचीत की प्रक्रिया की शुरूआत नहीं हुयी है ।

उन्होंने कहा कि अंतर-सरकारी वार्ता शुरू होने के बाद से 10 वर्ष में, वीटो की शक्तियों के संबंध में सदस्य देशों के बीच इस बात को लेकर मतभेद रहे हैं कि वीटो जारी रखा जा सकता है या इसमें संशोधन किया जा सकता है।

भारत एवं जी—4 के अन्य देशों ब्राजील, जापान एवं जर्मनी कह चुके हैं कि सुराक्षा परिषद में बदलाव लंबे समय से लंबित है ।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\