ताजा खबरें | बीमा संशोधन विधेयक रास में पेश : विपक्ष ने किया विरोध, सत्ता पक्ष ने बताया उपयोगी

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. बीमा (संशोधन) विधेयक को जनविरोधी बताते हुए राज्यसभा में बृहस्पतिवार को कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के सदस्यों ने इसे स्थायी समिति में भेजे जाने की मांग की तथा सरकार पर देश की पूंजी विदेशी हाथों में सौंपने का आरोप लगाया। वहीं सत्ता पक्ष ने इसे गरीबों के हित में उठाया जाने वाला कदम करार देते हुए कहा कि इससे अधिक से अधिक लोगों को बीमा की सुरक्षा मिलेगी।

नयी दिल्ली, 18 मार्च बीमा (संशोधन) विधेयक को जनविरोधी बताते हुए राज्यसभा में बृहस्पतिवार को कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के सदस्यों ने इसे स्थायी समिति में भेजे जाने की मांग की तथा सरकार पर देश की पूंजी विदेशी हाथों में सौंपने का आरोप लगाया। वहीं सत्ता पक्ष ने इसे गरीबों के हित में उठाया जाने वाला कदम करार देते हुए कहा कि इससे अधिक से अधिक लोगों को बीमा की सुरक्षा मिलेगी।

विधेयक पर चर्चा के दौरान अपनी बात रखते हुए कांग्रेस के आनंद शर्मा ने कहा ‘‘ विधेयक को लेकर आम लोगों में, पॉलिसी धारकों में, कर्मचारियों में, निवेशकों में गहरे भ्रम की स्थिति है। ’’?

उन्होंने कहा ‘‘ बीमा रणनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र है। यह एक दीर्घकालिक क्षेत्र है। भारत के विकास में इसका अहम योगदान रहा है। लोगों ने इसकी पॉलिसी लीं और उन्हें सामाजिक सुरक्षा भी मिली। करोड़ों गरीबों को इससे यह अहसास हुआ कि उनकी जमा राशि सुरक्षित है। इस पर लोगों का भरोसा बना रहा । लेकिन यह संशोधन विधेयक लोगों के इस भरोसे को तोड़ देगा।’’

शर्मा ने कहा ‘‘संसद के दोनों सदनों में, स्थायी समितियों में सरकार के पास बहुमत है। लेकिन यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर बहुमत अल्पमत से हट कर सोचना होगा।’’

उन्होने कहा ‘‘2000 में जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे तब इसमें 26 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी गई। जब 2004 में संप्रग सरकार ने एफडीआई को बढ़ा कर 49 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा तो वाजपेयी ने इसका समर्थन नहीं, विरोध किया था। तब वर्तमान प्रधानमंत्री ने भी इसका विरोध किया था। ’’

उन्होंने कहा ‘‘विधेयक विधि आयोग को भेजा गया। फिर 2008 में विधेयक स्थायी समिति के पास भेजा गया। 2011 में समिति ने 91 संशोधन किए जिनमें से 88 संशोधन सरकार ने स्वीकार किए। तब समिति के अध्यक्ष यशवंत सिन्हा थे। आप (तत्कालीन विपक्ष भाजपा) ने इसका तब भी विरोध किया था। आज सोच कैसे बदल गई।’’

शर्मा ने कहा ‘‘टाटा, बजाज एलायंस आदि भारत की महत्वपूर्ण कंपनियों ने दुनिया की अन्य कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम बनाए, लेकिन उन्होंने भी भारतीय नियंत्रण को ही महत्व दिया।’’

शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार ने इन कंपनियों के साथ परामर्श नहीं किया।

उन्होंने कहा ‘‘सरकार कई तरह की बीमा योजना लाई है और उनका विरोध नहीं हुआ। लेकिन यह विधेयक ऐसा नहीं है जिसे हम समर्थन दें। राष्ट्र का हित सर्वोपरि है इसलिए आम सहमति बनाई जानी चाहिए और फिर समावेशी नीति बने। इसके लिए जरूरी है कि इस विधेयक को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर, चिंता पर, स्थायी समिति में विचार किया जाए। इसे स्थायी समिति में भेजा जाए।’’

शर्मा ने कहा ‘‘आप आत्मनिर्भर भारत की बात कहते हैं। लेकिन देश की पूंजी आप विदेशी हाथों में सौंप कर आत्मनिर्भर भारत की बात कैसे कर सकते हैं।’’

इससे पहले चर्चा की शुरुआत करते हुए भाजपा के अरुण सिंह ने कहा ‘‘यह विधेयक समय की मांग है और इसे आम आदमी को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। ’’

उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाए जाने पर जो निवेश आएगा, उसका सीधा लाभ आम आदमी को होगा। उन्होंने कहा ‘‘समय बदल रहा है । साथ ही परिस्थितियां भी बदल रही हैं। इन हालात में हमें भी बदलना होगा। ’’

सिंह ने कहा ‘‘यह आरोप सही नहीं है कि बीमा क्षेत्र को बेचा जा रहा है। सरकार ने पहले भी कई कदम उठाए जिनका विरोध किया गया। लेकिन वे कदम सही साबित हुए।’’

उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से जो राशि आएगी, उससे आम लोगों को ही लाभ होगा। तब अधिकाधिक संख्या में लोग बीमा करा सकेंगे और उन्हें सामाजिक सुरक्षा मिलेगी।

सिंह ने कहा कि यह निवेश प्रौद्योगिकी के उन्नयन में भी मददगार होगा।

इससे पहले, उच्च सदन में कांग्रेस नीत विपक्षी सदस्यों ने बृहस्पतिवार को बीमा (संशोधन) विधेयक का विरोध करते हुए हंगामा किया जिससे कारण सदन की बैठक चार बार बाधित हुयी।

नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खडगे ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि सरकार ने पहले ही बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़ाकर 49 प्रतिशत कर दिया है और अब इस विधेयक के जरिए यह सीमा 74 प्रतिशत की जा रही है। उन्होंने विधेयक को संबंधित स्थायी समिति में भेजे जाने की मांग की।

द्रमुक के टी शिवा ने भी इसे स्थायी समिति में भेजे जाने की मांग की।

जारी

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