नयी दिल्ली, 19 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस को एक सड़क पर लगाए गए अवरोधकों के चलते दुर्घटना के शिकार हुए युवक को 75 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि पीड़ित को दिल्ली पुलिस की लापरवाही और विफलता के लिए हर्जाने का दावा करने का अधिकार है।
न्यायमूर्ति नवीन चावला ने कहा कि अवरोधकों पर ऐसी कोई चीज नहीं लगी हुई थी, जिससे वे दूर से दिखाई दे सकें।
अदालत ने 2015 की इस घटना के संबंध में याचिकाकर्ता धीरज कुमार को 75 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। उस समय कुमार 21 साल के थे।
घटना दिसंबर 2015 में वेस्ट पंजाबी बाग इलाके के निकट हुई जब कुमार और उसके पिता मोटरसाइकिल पर घर जा रहे थे। इस दौरान उनकी मोटर साइकिल पुलिस अवरोधकों से टकरा गई ।
पीड़ित को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। कई ऑपरेशनों और इलाज के बाद उसे बेहोशी की हालत में ही छुट्टी दी गई।
अदालत को बताया गया कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के सारांश रिकॉर्ड के मुताबिक वह स्पष्ट रूप से सोचने या ध्यान केंद्रित करने में असमर्थ था और अब तक उसकी हालत ऐसी ही है।
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