नयी दिल्ली, 11 जुलाई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उच्च शिक्षण संस्थानों में शोध एवं नवाचार के महत्व को रेखांकित करते हुए मंगलवार को कहा कि बहुमूल्य बौद्धिक संपदा सृजित करने और नवाचार के जरिये राजस्व आर्जित करने वाले संस्थानों को प्रोत्साहित करने के लिए उपाय ढूंढ़ने की जरूरत है।
राष्ट्रपति भवन में आयोजित दो दिवसीय ‘विजिटर सम्मेलन 2023’ के समापन सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने यह बात कही। राष्ट्रपति उच्चतर शिक्षा के 162 केंद्रीय संस्थानों की विजिटर हैं।
उन्होंने कहा कि दुनिया के प्रमुख विश्वविद्यालयों एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों में नवाचार, अनुसंधान एवं विकास पर काफी ध्यान दिया जा रहा है जिसका उपयोग आर्थिक एवं औद्योगिक गतिविधियों में किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों में भी वह क्षमता है जो उन्हें अनुसंधान एवं नवाचार का ‘पावरहाउस’ बना सकती है।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ मैं यह जानकर खुश हूं कि हमारे उच्च शिक्षण संस्थान स्टार्टअप को बढ़ावा दे रहे हैं और बुनियादी शोध को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि ऐसे अनुसंधान एवं नवाचार का औद्योगिक उद्देश्यों में उपयोग किया जा सकता है।
मुर्मू ने कहा कि ऐसे संस्थान जो बहुमूल्य बौद्धिक संपदा सृजित करते हों और नवाचार के जरिये राजस्व अर्जित करते हों, उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए कोई उपाय ढूंढ़ा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान संविधान में प्रदत्त समानता, न्याय, व्यक्ति का सम्मान, विविधता, महिलाओं का सम्मान जैसे आदर्शों को प्रोत्साहित करने का प्रभावी मंच हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि संवेदनशीलता के ये सभी आयाम उच्च शिक्षा को समग्रता प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग के शक्तिशाली एवं विकासशील देश अपने उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए जाने जाते हैं और दूसरे स्थानों के छात्र भी वहां पढ़ना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि देश में जिस प्रकार डिजिटल इंडिया के तहत सरकार और जनता की भागीदारी से देश में बड़ी संख्या में लोग डिजिटल लेनदेन से जुड़े, उसी प्रकार से उन्हें विश्वास है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी ऐसा परिवर्तनकारी परिणाम प्राप्त होगा।
मुर्मू ने कहा कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के जरिये भारतीय समाज को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने और देश की अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने का लक्ष्य रखा गया है और डिजिटल क्षेत्र में नीतियों और कार्यक्रमों के परिणाम बहुत प्रभावशाली रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के डिजिटल आधारभूत ढांचे तथा समावेशिता की चर्चा पूरे विश्व में की जा रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि आज पूरे विश्व में होने वाले डिजिटल लेनदेन का 46 प्रतिशत भारत में होता है और सरकार की प्रभावी पहल तथा जनता की भागीदारी से क्रांतिकारी परिवर्तन बहुत कम समय में ही संभव हुआ है ।
उन्होंने कहा कि इस समावेशी परिवर्तन में छोटे से छोटे स्तर पर लेनदेन करने वाले फल और सब्जी विक्रेता, ग्राहक, ऑटोरिक्शा चालक आदि शामिल हैं।
मुर्मू ने कहा, ‘‘ मुझे विश्वास है कि इसी तरह के परिवर्तनकारी तथा समावेशी परिणाम उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी प्राप्त किए जाएंगे और ऐसी प्रामाणिक उपलब्धियों की भी सराहना विश्व स्तर पर की जाएगी।’’
उन्होंने कहा कि जी20 की अपनी अध्यक्षता में भारत की कोशिश सदस्य देशों के साथ मिलकर वैश्विक चुनौतियों का समाधान तलाशने पर होगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि इस वर्ष भारत जी20 समूह का नेतृत्व कर रहा है और एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य के मंत्र के साथ भारत की पूरी कोशिश है कि जी-20 के सदस्य देशों के साथ मिलकर मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का सामूहिक समाधान निकाला जाए।
उन्होंने कहा कि जी-20 देशों का विश्व के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 85 प्रतिशत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में 75 प्रतिशत हिस्सा है। इन देशों की जनसंख्या विश्व की जनसंख्या की दो तिहाई है।
उन्होंने कहा कि यदि भारत की जी-20 देशों की शिक्षा व्यवस्था में अग्रणी स्थिति बनती है तो भारत ज्ञान का ‘सुपरपावर’ बनने के राष्ट्रीय लक्ष्य को अवश्य प्राप्त कर लेगा।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY