देश की खबरें | आईएनएस विंध्यगिरि-एमवी नोर्डलेक टक्कर: अदालत ने जर्मन कंपनी की देनदारी 30 करोड़ रुपये तय की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बंबई उच्च न्यायालय ने एक व्यापारिक जहाज से टक्कर के कारण भारतीय नौसैनिक जहाज (आईएनएस) विंध्यगिरि के डूब जाने की घटना के 12 साल बाद यह फैसला सुनाया है कि कंटेनर वाहक जहाज को दुर्घटना से हुए नुकसान और क्षति के लिए अपनी देयता को 30 करोड़ रुपये तक सीमित करने का अधिकार है।

मुंबई, 22 फरवरी बंबई उच्च न्यायालय ने एक व्यापारिक जहाज से टक्कर के कारण भारतीय नौसैनिक जहाज (आईएनएस) विंध्यगिरि के डूब जाने की घटना के 12 साल बाद यह फैसला सुनाया है कि कंटेनर वाहक जहाज को दुर्घटना से हुए नुकसान और क्षति के लिए अपनी देयता को 30 करोड़ रुपये तक सीमित करने का अधिकार है।

अदालत ने केंद्र सरकार के 1,397 करोड़ रुपये के दावे के खिलाफ सभी दावों के लिए मर्चेंट वेसल नोर्डलेक (एमवी नोर्डलेक) के मालिक की देनदारी को लगभग 30 करोड़ रुपये तक सीमित कर दिया।

न्यायमूर्ति एन जे जामदार की एकल पीठ ने पिछले सप्ताह पारित एक आदेश में कहा कि जहाज मालिक का मर्चेंट शिपिंग अधिनियम की धारा 352ए के तहत अपनी देयता को सीमित करने का अधिकार "पूर्ण था, खासकर इस बात की परवाह किए बिना कि जहाज के मालिक की गलती थी या नहीं"।

अदालत ने कहा कि देय राशि पर 30 जनवरी, 2011 (घटना की तारीख) से फरवरी 2023 तक 12.75 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज लगेगा।

एकल पीठ ने, हालांकि छह सप्ताह के लिए अपने आदेश पर रोक लगा दी, ताकि केंद्र अपील के जरिये उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सके।

उल्लेखनीय है कि 30 जनवरी, 2011 को एमवी नोर्डलेक मुंबई बंदरगाह से बाहर निकल रहा था उस वक्त आईएनएस विंध्यगिरि सहित 14 नौसैनिक जहाजों का एक काफिला बंदरगाह में प्रवेश कर रहा था। दो पोत (एमवी नोर्डलेक और आईएनएस विंध्यगिरि) टकरा गए, जिसके बाद नौसैनिक जहाज बंदरगाह पर ही फंस गया और अगले दिन यह जहाज डूब गया।

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