नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर वित्त मंत्रालय की आर्थिक समीक्षा में शनिवार को आगाह किया गया कि भूराजनीतिक स्थिति बिगड़ने और उसकी वजह से ऊर्जा की वैश्विक कीमतें और आपूर्ति श्रृंखला का दबाव बढ़ने की स्थिति में मुद्रास्फीति फिर से सिर उठा सकती है।
समीक्षा में कहा गया है कि भारत दुनिया के ज्यादातर अन्य देशों की तुलना में मुद्रास्फीति से कहीं बेहतर तरीके से निपटा है। इसमें कहा गया कि मौसम अनुकूल बना रहता है तो खुदरा मुद्रास्फीति आने वाले महीनों में घटेगी जिससे कुल खुदरा मुद्रास्फीति भी कम होगी। इस रिपोर्ट में वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति को लेकर चिंता जताई गई है।
समीक्षा के मुताबिक, ‘‘भूराजनीतिक तनाव बढ़ने की स्थिति में आपूर्ति श्रृंखला का दबाव बढ़ सकता है जिसमें हाल में कुछ कमी आई है। ऐसा होता है तो 2023 में मुद्रास्फीति घटने के बजाय बढ़ सकती है।’’
इन छह महीनों में भारत में खुदरा मुद्रास्फीति 7.2 फीसदी पर रही है जो विश्व स्तर पर आठ प्रतिशत पर रही। वहीं अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में 5.4 फीसदी की गिरावट आई जो छह प्रमुख मुद्राओं में आई 8.9 फीसदी की गिरावट से कम है।
इसमें कहा गया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जुलाई 2022 के दौरान कई कदम उठाए हैं जिनसे पूंजीगत प्रवाह में और स्थिरता आने की उम्मीद है जिससे रुपये को बल मिलेगा।
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