जरुरी जानकारी | ब्रिटेन में मुद्रास्फीति 40 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने बुधवार को उपभोक्ता मूल्य पर आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी करते हुए कहा कि जून महीने में यह बढ़कर 9.4 प्रतिशत हो गई। एक महीने पहले यह 9.1 प्रतिशत पर थी।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने बुधवार को उपभोक्ता मूल्य पर आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी करते हुए कहा कि जून महीने में यह बढ़कर 9.4 प्रतिशत हो गई। एक महीने पहले यह 9.1 प्रतिशत पर थी।

मुद्रास्फीति का यह आंकड़ा वर्ष 1982 के बाद का सर्वाधिक स्तर है। उस समय मुद्रास्फीति 11 प्रतिशत पर पहुंच गई थी।

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ने के बाद से आपूर्ति शृंखला पर असर पड़ने से ब्रिटेन समेत तमाम देशों में मुद्रास्फीति एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। इसकी वजह से खाद्य उत्पादों एवं ईंधन की कीमतें भी काफी बढ़ गई हैं जिससे आम जनजीवन पर बहुत गहरा असर पड़ा है।

इस साल खाद्य मद्रास्फीति 9.8 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है, जबकि पेट्रोल एवं डीजल के दाम बीते साल में 42.3 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।

बढ़ती मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए ब्रिटिश केंद्रीय बैंक के गवर्नर एंड्रयू बेली पहले ही ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना जता चुके हैं। दिसंबर, 2021 से अबतक बैंक ऑफ इंग्लैंड पांच बार ब्याज दरें बढ़ा चुका है।

ब्रिटेन की तरह अमेरिकी अर्थव्यवस्था भी मुद्रास्फीति की मार से त्रस्त है। अमेरिका में मुद्रास्फीति जून में 9.1 प्रतिशत के साथ चार दशकों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है।

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