देश की खबरें | संक्रामक रोगों के मामले में अब ध्यान बड़े बच्चों और किशोरों पर होना चाहिए: अध्ययन

नयी दिल्ली, पांच जुलाई दुनियाभर में हर साल 30 लाख बच्चों और किशोरों की संक्रामक रोगों से मौत हो जाती है जो प्रति 10 सैकंड एक मृत्यु के समान है और इन संक्रामक रोगों का सर्वाधिक प्रकोप भारत, नाइजीरिया और पाकिस्तान में है।

‘द लांसेट’ पत्रिका में प्रकाशित एक नये अध्ययन में यह दावा किया गया है।

मर्डोक चिल्ड्रन्स रिसर्च इंस्टीट्यूट, ऑस्ट्रेलिया और इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवेल्यूएशन, अमेरिका के नेतृत्व में किए गए अध्ययन के अनुसार, निम्न से मध्यम आय वाले देशों में मौत के आधे से अधिक मामलों का कारण संक्रामक रोगों को पाया गया, जबकि उच्च आय वाले देशों में यह 6 प्रतिशत है।

दुनिया के 204 देशों में वर्ष 1990 से 2019 के बीच जन्म से लेकर 24 वर्ष की आयु तक के लोगों को अध्ययन में शामिल किया गया और पाया गया कि संक्रामक रोग नियंत्रण उपायों में मुख्य रूप से पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, जबकि पांच से 24 वर्ष की आयु के लोगों पर कम ध्यान दिया गया है।

इसे देखते हुए अध्ययन में किशोरों और बड़े बच्चों पर अधिक ध्यान देते हुए वैश्विक रोग नियंत्रण प्रयासों का आह्वान किया गया है।

कम उम्र के बच्चों में संक्रामक रोगों और उनसे मौत के मामलों में दो तिहाई मामले अतिसार, निमोनिया और मलेरिया के थे, वहीं किशोरों में एचआईवी और टीबी जैसे रोग प्रमुख कारण पाये गये।

मर्डोक चिल्ड्रन्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर पीटर एजोपार्डी ने कहा कि कोविड-19 महामारी और जीका वायरस तथा इबोला जैसी बीमारियों को देखते हुए वैश्विक नीति, वित्तपोषण, संसाधन आवंटन और स्वास्थ्य प्रणालियों के लिहाज से अनुसंधान के प्रभाव महत्वपूर्ण होंगे।

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