विदेश की खबरें | इंडोनेशिया का प्रम्बानन मंदिर: दक्षिण पूर्व एशिया के साथ भारत के गहरे सांस्कृतिक संबंधों का प्रमाण
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

योग्यकार्ता (इंडोनेशिया), 10 दिसंबर मुस्लिम-बहुल देश इंडोनेशिया के योग्यकार्ता शहर के बाहरी इलाके में 240 हिंदू मंदिरों से सुसज्जित सदियों पुराना प्रम्बानन मंदिर, दक्षिण पूर्व एशिया के साथ भारत के गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का प्रमाण है।

योग्यकार्ता शहर से लगभग 17 किलोमीटर उत्तर पूर्व में स्थित 10वीं सदी का प्रम्बानन मंदिर, इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर माना जाता है।

यूनेस्को विरासत स्थल, कैंडी प्रम्बानन के नाम से मशहूर प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया के प्रमुख मंदिरों में से एक है। बाली के अलावा यह मंदिर भी भारतीय पर्यटकों को काफी आकर्षित करता है।

क्षेत्र के कई मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए भारत आर्थिक सहायत उपलब्ध कराता रहा है। साथ ही भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से करीबी देशों को सांस्कृतिक कूटनीति के तहत अपनी सेवाएं भी देता है।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने आसियान देशों-लाओस, वियतनाम, इंडोनेशिया और कंबोडिया में कई ऐतिहासिक स्थलों के जीर्णोद्धार का भी काम किया है।

आसियान में भारत के राजदूत जयंत खोबरागड़े ने कहा कि नयी दिल्ली प्रम्बानन मंदिर के जीर्णोद्धार के सहयोग में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा, हालांकि, भारत आसियान के सदस्य देशों में कई मंदिरों के जीर्णोद्धार में सहायता कर रहा है।

प्रम्बानन मंदिर का मूल परिसर भूकंपों और ज्वालामुखी विस्फोटों से नष्ट हो गया था। 17वीं शताब्दी में इसे फिर से खोजा गया और अब पुन: स्थापित किया जा रहा है।

एक स्थानीय अधिकारी ने बताया, ‘‘पहले इसका निर्माण पत्थरों को आपस में जोड़ने की विधि से किया गया था। यह एक बहुत ही जटिल संरचना है। अब तक, परिसर के 240 मंदिरों में से सिर्फ 22 मंदिरों का ही जीर्णोद्धार हो पाया है।’’

उन्होंने बताया कि और भी संरचनाओं को पुन: स्थापित करने का काम चल रहा है।

यह मंदिर तीन मुख्य हिंदू देवताओं ‘त्रिमूर्ति’- ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) को समर्पित है।

यूनेस्को की वेबसाइट के अनुसार, ‘‘मंदिर की संरचना को मजबूत करने के लिए दोनों विधि- पत्थर को आपस में जोड़ने की मूल पारंपरिक विधि और कंक्रीट का उपयोग कर आधुनिक विधि से कार्य किया जा रहा है। जीर्णोद्धार का कार्य 1918 से चल रहा है।’’

मंदिर परिसर के लिए सरकार द्वारा अधिकृत एक पर्यटक गाइड ने संरचना की अनूठी निर्माण शैली के बारे में बताते हुए कहा कि मूल परिसर की कोई भी तस्वीरें नहीं होने से जीर्णोद्धार कार्य काफी कठिन है।

उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि यह एक यूनेस्को विरासत स्थल है। ऐसे में नियम के अनुसार जीर्णोद्धार के लिए 25 प्रतिशत से अधिक नए पत्थरों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है। यह भी एक कारण है कि इस कार्य में काफी समय लग रहा है।’’

प्रम्बानन मंदिर की मूल संरचना आयताकार थी, जिसमें एक बाहरी प्रांगण, मध्य प्रांगण और आंतरिक प्रांगण हैं। मंदिरों को ऊंची और निचली छत में विभाजित किया गया है।

ऊंची छत पर शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित तीन प्रमुख मंदिर हैं और उनके सामने उनके पशु वाहनों के तीन छोटे मंदिर हैं। विष्णु मंदिर के सामने गरुड़, शिव मंदिर के सामने नंदी, और ब्रह्मा मंदिर के सामने अंगसा मंदिर हैं। शिव मंदिर सबसे बड़ा और सबसे प्रमुख है।

शाम की प्रार्थना के बाद एक पुजारी ने ‘पीटीआई-’ को बताया, ‘‘हम दिन में तीन बार पूजा करते हैं। सुबह लगभग आठ बजे ‘सूर्य पूजा’ करते हैं, दोपहर के आसपास ‘रैना पूजा’ और सूर्यास्त में अंतिम पूजा की जाती है।’’

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