नयी दिल्ली, 27 दिसंबर विदेश मंत्रालय ने एक संसदीय समिति को सूचित किया है कि भारत की मदद वाली परियोजनाओं को अफगानिस्तान में झटका लगा है और म्यांमा में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। मंत्रालय ने कहा कि इन देशों में मौजूदा राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति के कारण ये परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद पी पी चौधरी की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने कहा कि अफगानिस्तान को सहायता के आवंटन में कमी की गई है। पिछले सप्ताह संसद में पेश की गई एक कार्रवाई रिपोर्ट में, विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसने संसदीय समिति की टिप्पणियों का संज्ञान लिया है और उनके निराकरण की दिशा में काम करेगा।
अफगानिस्तान के साथ भारत की विकास साझेदारी में इसके 34 प्रांतों और विभिन्न क्षेत्रों में 500 से अधिक परियोजनाएं शामिल हैं। मंत्रालय ने रिपोर्ट में कहा है, ‘‘इस संबंध में कई प्रस्ताव पहले से ही प्रक्रियाधीन हैं। अफगानिस्तान में राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति के कारण, परियोजनाओं के क्रियान्वयन को झटका लगा है।’’
म्यांमा को आवंटन पर संसदीय समिति की टिप्पणियों का जवाब देते हुए मंत्रालय ने कहा कि देश में मौजूदा राजनीतिक हालात के बावजूद, भारत ने इस साल मार्च में सूचना प्रौद्योगिकी और कृषि अनुसंधान प्रत्येक पर क्षमता निर्माण संस्थान के कार्य को पूरा किया और सौंप दिया है।
‘कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट’ के बारे में मंत्रालय ने कहा कि इसका जलमार्ग वाला काम पूरा हो गया है। जबकि इसके तहत सड़क संबंधी निर्माण कार्य धीमा रहा है। इसमें मुख्य रूप से म्यांमा की ओर सुरक्षा स्थिति और कोविड-19 महामारी के कारण देरी हुई है।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘म्यांमा में मौजूदा सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति को देखते हुए उपरोक्त परियोजनाओं के क्रियान्वयन और निष्पादन को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY