देश की खबरें | कड़कड़ाती सर्दी में 20 किमी. पैदल चल यूक्रेन पोलेंड सीमा पर पहुंचे भारतीय भाई-बहन

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(संदीप दहिया)

जयपुर, 26 फरवरी यूक्रेन में ताजा संकट के बीच वहां पढ़ाई करने गए भारतीय विद्यार्थियों के सामने युद्ध के साथ-साथ कड़कड़ाती सर्दी का संकट है तो भविष्य को लेकर अनिश्चितता के बादल भी मंडरा रहे हैं। ऐसे ही एक वाकये में 21 साल का एक मेडिकल विद्यार्थी अपनी बड़ी बहन के साथ यूक्रेन के टेरनोलिप से पोलेंड सीमा तक पहुंचने के लिए 200 किलोमीटर बस में तथा बाद में 20 किलोमीटर कड़कड़ाती सर्दी में पैदल चला। हालांकि अपने गंतव्य पर पहुंचने पर भी उन दोनों का सफर खत्म नहीं हुआ वहां लंबी कतारों में लोग इंतजार करते मिले।

कमोबेश ऐसी ही कहानी सैकड़ों अन्य लोगों की है जो सुरक्षित ठिकाने एवं पारगमन के लिए किसी तरह शेहनी-मीड्यका सीमा पर पहुंच रहे हैं। यह अलग बात है कि इस सीमा पर हालात और भी अराजक है जहां लोगों को सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी जा रही। वहां सुरक्षित आश्रय चाहने वालों की भीड़ लगी है।

इस सीमा से 630 किलोमीटर की दूरी पर, आयुषी विश्नोई, उसके दोस्त और कई अन्य लोग यूक्रेन के कीव में एक छात्रावास की इमारत में फंसे हुए हैं। वे बमबारी होते देख रहे हैं, बार-बार सायरन सुनते हैं और कमरों और भूमिगत बंकरों के बीच जगह बदल रहे हैं। वे अपनी सुरक्षा के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

हालांकि पोलैंड की सीमा बमबारी से तुलनात्मक रूप से सुरक्षित है लेकिन यूक्रेनी शहर कीव में रॉकेट हमलों और बमबारी से स्थिति भयावह है।

मेहुल, मेघना और आयुषी की तरह यूक्रेन में राजस्थान के सैकड़ों सहित हजारों भारतीय छात्र हैं जो वहां के ताजा हालात में दहशत और चिंता के साये में हैं और वहां से बाहर निकलने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

जोधपुर की रहने वाले आयुषी ने फोन पर पीटीआई- से कहा,‘‘हम 18-21 वर्ष के आयु वर्ग के में हैं। हम यहां दो महीने पहले ही आए थे। हम इन हालात का सामना करने के लिए बिलकुल तैयार नहीं हैं। हम चिंतित हैं, हमारे माता-पिता चिंतित हैं, हम चाहते हैं किसी भी तरह घर वापस पहुंचे।’’

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