लंदन, 28 जुलाई भारत और ब्रिटेन 80 लाख पाउंड राशि की पांच परियोजनाओं के साथ विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में अपने सहयोग को आगे बढ़ाएंगे।
ब्रिटेन इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए ब्रिटिश अनुसंधान और नवोन्मेष (यूकेआरआई) निधि से 40 लाख पाउंड की राशि देगा और भारत अपने संसाधनों का उपयोग कर इतनी ही राशि का योगदान देगा। इस तरह से कुल योगदान 80 लाख पाउंड होगा।
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ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय में दक्षिण एशिया और राष्ट्रमंडल मामलों के मंत्री तारिक अहमद ने मंगलवार को इस नए समझौते की घोषणा की।
अहमद ने कहा, ‘‘ब्रिटेन कोविड-19 के टीके के निर्माण के लिए भारत के सीरम इंस्टीट्यूट के साथ पहले ही साझेदारी कर चुका है, अगर क्लिनिकल ट्रायल सफल हुए तो, हमारी योजना टीके को विकासशील देशों के अरबों लोगों के बीच बांटने की है।’’
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उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हम साथ मिलकर दुनिया की आपात वैश्विक स्वास्थ्य समस्याओं के निवारण के लिए और कुछ कर सकते हैं। अनुसंधान और नवोन्मेष के क्षेत्र में हमारी साझेदारी से ब्रिटेन, भारत और अन्य देशों को लाभ होगा।’’
दुनिया में दवाओं की आपूर्ति के क्षेत्र में भारत सूक्ष्मजीवी रोधी दवाओं का प्रमुख उत्पादक है, और अनुसंधान परियोजना का लक्ष्य इस बात की बेहतर समझ विकसित करना है कि सूक्ष्मजीवी रोधी दवाओं के उत्पादन से निकलने वाले अपशिष्ट का उपयोग सूक्ष्मजीवी रोधी दवाओं के प्रतिरोध को कम करने के लिए कैसे किया जा सकता है।
इस निधि के तहत पांच परियोजनाएं सितंबर में शुरू होने की योजना है, अगर उन्हें समय पर मंजूरी मिल जाए।
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