दुबई, तीन दिसंबर भारत ने ओजोन क्षयकारी पदार्थ और जलवायु को गर्म करने वाले रसायन एचसीएफसी 141बी को चरणबद्ध तरीके से सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया है और ऐसी अन्य गैस, एचसीएफसी को समाप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वैश्विक जलवायु वार्ता के दौरान रविवार को यहां जारी एक सरकारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
वार्षिक जलवायु वार्ता सीओपी28 के इतर एक कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण मंत्रालय और यूएनडीपी द्वारा संयुक्त रूप से पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि एचसीएफसी के लिए 35 प्रतिशत चरणबद्ध लक्ष्य को पार करते हुए, भारत ने जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सहयोग और नवाचार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करते हुए 44 प्रतिशत की प्रभावशाली कटौती की है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एचसीएफसी प्रबंधन योजना (एचपीएमपी) चरण- दो में उल्लिखित भारत के सक्रिय उपायों ने वैश्विक जलवायु कार्रवाई के लिए एक उल्लेखनीय उदाहरण स्थापित किया है।
इसमें कहा गया है कि भारत ने ओजोन क्षयकारी पदार्थ और जलवायु को गर्म करने वाले रसायन 1,1-डाइक्लोरो-1-फ्लोरोइथेन (एचसीएफसी-141बी) को सफलतापूर्वक चरणबद्ध तरीके से खत्म कर दिया है और नए उपकरण निर्माण में ऐसी ही एक अन्य गैस हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन को खत्म करने में समय से आगे है।
पर्यावरण सचिव लीना नंदन ने कहा कि भारत ने ओजोन को प्रभावित करने वाले पदार्थों से निपटने के उपायों को लागू करने में एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण का प्रदर्शन किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम आज न केवल अपनी जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा कर रहे हैं, बल्कि अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।’’
नंदन ने ई-कचरा प्रबंधन नियमों और विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) दिशानिर्देशों के अनुरूप पर्यावरण संरक्षण और जलवायु शमन के लिए भारत की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।
भारत के व्यापक जलवायु लक्ष्यों के बारे में उन्होंने आर्थिक विकास से उत्सर्जन को कम करने की देश की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने 2019 में अर्थव्यवस्था की उत्सर्जन तीव्रता में 33 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी हासिल की है, जो 2030 के लिए निर्धारित लक्ष्य को पार कर गया है।’’
नंदन ने सतत विकास के प्रति भारत के समर्पण पर जोर देते हुए कहा, ‘‘भारत अपनी उपलब्धियों पर चुप नहीं बैठता। हमने अपने जलवायु उत्सर्जन को और भी अधिक बढ़ा दिया है, जो हमारी चिंता को जाहिर करता है कि एक वैश्विक समुदाय के रूप में, हमें जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए और भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है।’’
रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक विकास, बढ़ती प्रति व्यक्ति आय, जनसंख्या वृद्धि और शहरीकरण के कारण बढ़ती मांग के मद्देनजर एक ‘इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान’ (आईसीएपी) लाया गया।
आईसीएपी सभी क्षेत्रों में कूलिंग की दिशा में एक एकीकृत दृष्टिकोण प्रदान करता है।
इसमें कहा गया है कि शीतलन की आवश्यकता विभिन्न क्षेत्रों में होती है और आर्थिक विकास के लिए एक आवश्यक हिस्सा है और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों जैसे आवासीय और वाणिज्यिक भवनों, कोल्ड-चेन, प्रशीतन, परिवहन और उद्योगों में इसकी आवश्यकता होती है।
इस कार्यक्रम में जलवायु और पर्यावरण के लिए कार्रवाई, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी), भारत के प्रमुख डॉ. आशीष चतुर्वेदी की अध्यक्षता में एक चर्चा हुई। चर्चा के दौरान व्यापारिक नेताओं और तकनीकी एजेंसियों ने स्थायी शीतलन पर अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।
(यह खबर 2023 क्लाइमेट चेंज मीडिया पार्टनरशिप’ के तहत तैयार की गई है जो ‘इंटरन्यूज अर्थ जर्नलिज्म नेटवर्क’ और ‘स्टैनली सेंटर फॉर पीस एंड सिक्योरिटी’ द्वारा आयोजित एक पत्रकारिता फेलोशिप है।)
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