जरुरी जानकारी | ‘भारत तेल एवं गैस क्षेत्रों की जरूरतो को पुरा करने को इस्पात उत्पादन में समक्ष’

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. घरेलू इस्पात कंपनियों ने कहा है कि भारत देश के तेल एवं गैस क्षेत्रों की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने लिए विशेष ग्रेड के इस्पात उत्पादन में सक्षम है।

नयी दिल्ली, 16 जून घरेलू इस्पात कंपनियों ने कहा है कि भारत देश के तेल एवं गैस क्षेत्रों की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने लिए विशेष ग्रेड के इस्पात उत्पादन में सक्षम है।

उद्योग मंडल फिक्की द्वारा आयोजित वेबिनार में इस्पात कंपनियों ने यह बात कही। इस वेबिनार में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी हिस्सा लिया।

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इस बैठक का आयोजन तेल एवं गैस क्षेत्रों में घरेलू स्तर पर विनिर्मित इस्पात के उपयोग को प्रोत्साहन देने के तरीकों पर अंशधारकों के साथ विचार-विमर्श के लिए किया गया था।

प्रधान ने वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार अगले दस साल में तेल रिफाइनिंग क्षमता को दोगुा कर 45 से 50 करोड़ टन करने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि रिफाइनरी के निर्माण के अलावा तेल एवं गैस पाइपलाइन बिछाने तथा शहर गैस वितरण नेटवर्क के विस्तार के लिए देश में इस्पात की मांग बढ़ेगी।

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जेएसडब्ल्यू स्टील के निदेशक (वाणिज्यिक एवं विपणन) जयंत आचार्य ने कहा, ‘‘भारत की आर्थिक वृद्धि काफी हद तक ऊर्जा से जुड़ी है। ऐेसे में तेल एवं गैस की मांग में काफी बढ़ोतरी होगी। मंत्री ने देश में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस के लिए आवश्यक ढांचा उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे के लिए करोड़ों रुपये का निवेश उपलब्ध कराया है।’’

आचार्य ने कहा कि भारत के पास तेल एवं गैस क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सभी आवश्यक इस्पात एवं पाइप विनिर्माण क्षमता है।

जिंदल स्टील एवं पावर (जेएसपीएल) के प्रबंध निदेशक वी आर शर्मा ने कहा कि देश के तेल एवं गैस क्षेत्र के लिए ग्रेड के इस्पात के विनिर्माण की क्षमता भारत के पास पहले से है।

आर्सेलरमित्तल निप्पन स्टील इंडिया (एएमएनएस) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) दिलीप ओम्मन ने कहा कि भारत में पहले से विश्वस्तरीय सुविधाए हैं। उन्होंने सरकार का ध्यान तेल एवं गैस क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले इस्पात उत्पादों के आयात की ओर दिलाया।

उन्होंने कहा कि जनवरी, 2019 से मार्च, 2020 के दौरान सिर्फ पाइपलाइन परियोजनाओं के लिए 8,73,000 टन इस्पात का आयात किया गया। इनमें से 50 प्रतिशत आयात मुक्त व्यापार करार (एफटीए) वाले देशों तथा 46 प्रतिशत चीने से किया गया। उन्होंने कहा कि यह स्थिति सरकार के आत्मनिर्भर अभियान से मेल नहीं खाती है।

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