विदेश की खबरें | भारत, स्वीडन ने लीडआईटी 2.0 की शुरुआत की
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दुबई, एक दिसंबर भारत और स्वीडन ने शुक्रवार को लीडआईटी 2.0 की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य विकासशील देशों में उद्योगों में बदलाव के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के साथ ही कम कार्बन उत्सर्जन प्रौद्योगिकी का सह-विकास और हस्तांतरण करना है।
दुबई में जारी संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता में लीडआईटी सत्र के दौरान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशों के लिए ‘नेट-जीरो’ (शुद्ध शून्य) उत्सर्जन लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सरकारों और उद्योग के बीच साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘लीडआईटी (उद्योग परिवर्तन के लिए नेतृत्व) पहल इसका एक प्रमुख उदाहरण है।’’
‘नेट जीरो’ का मतलब है वायुमंडल में डाली जाने वाली और वापस ली गई ग्रीनहाउस गैसों के बीच संतुलन हासिल करना।
लीडआईटी एक बदलाव की रूपरेखा विकसित करने और लोहा, इस्पात, सीमेंट और परिवहन क्षेत्रों के भीतर ज्ञान साझा करने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 18 देश और 20 कंपनियां लीडआईटी समूह का हिस्सा हैं।
लीडआईटी 2.0 विकासशील देशों में उद्योग परिवर्तन के लिए वित्तीय सहायता के साथ ही एक समावेशी और न्यायसंगत उद्योग परिवर्तन, कम-कार्बन उत्सर्जन प्रौद्योगिकी के सह-विकास और हस्तांतरण पर ध्यान केंद्रित करेगा।
भारत और स्वीडन ने सरकारों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, शोधकर्ताओं और थिंक टैंक को जोड़ने के लिए डिजाइन किए गए एक "उद्योग परिवर्तन मंच" का उद्घाटन किया।
लीडआईटी की शुरुआत वर्ष 2019 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन में की गई थी। यह सार्वजनिक-निजी सहयोग के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।
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