नयी दिल्ली, 14 सितंबर भारत और मंगोलिया ने मध्य एशियाई देश की पहली तेल रिफाइनरी के निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। भारत की सहायता से इस परियोजना को पूरा किया जा रहा है।
परियोजना की समीक्षा विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) सौरभ कुमार की मंगोलिया की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान की गई जो बृहस्पतिवार को संपन्न हुई। कुमार ने मंगोलियाई विदेश मंत्रालय में सचिव एन अंकबयार के साथ चर्चा की। उन्होंने शिक्षा एवं विज्ञान मंत्री एल एनख-अमगलान तथा मंत्री एवं मुख्य कैबिनेट सचिव डी अमरबायसगलान से मुलाकात की।
विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, कुमार ने गंदन और पेथुब मठों की भी यात्रा की और डोर्नोगोबी प्रांत में तेल रिफाइनरी परियोजना के निर्माण स्थल का भी निरीक्षण किया।
बयान में कहा गया, ‘‘यात्रा के दौरान, दोनों पक्षों ने भारत-मंगोलिया रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा उच्च स्तरीय जुड़ाव बनाए रखने पर चर्चा की।’’
बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने विकासात्मक साझेदारी, शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), नवीकरणीय ऊर्जा, संपर्क, संस्कृति, क्षमता निर्माण, हाइड्रोकार्बन, खनन, रक्षा और सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
बयान में कहा गया, ‘‘चर्चा मंगोलिया में भारतीय परियोजनाओं पर केंद्रित रही, जिनमें 1.5 एमएमटीपीए तेल रिफाइनरी परियोजना, ए बी वाजपेयी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन आईटी, संचार और आउटसोर्सिंग और भारत-मंगोलिया फ्रेंडशिप स्कूल शामिल है।’’
बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने आपसी हित के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
इस रिफाइनरी से रूस से तेल आयात पर मंगोलिया की निर्भरता कम होने की उम्मीद है। परियोजना पूरी होने पर यह रिफाइनरी प्रति दिन 30,000 बैरल कच्चे तेल या सालाना 15 लाख टन कच्चे तेल को शोधित करने में सक्षम होगी और देश को गैसोलीन, डीजल, विमानन ईंधन और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस जैसे पेट्रोलियम उत्पादों की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY