देश की खबरें | अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत को असहयोग का सामना करना पड़ा, कर्मठ वैज्ञानिकों ने भारत की साख मजबूत की: राष्ट्रपति

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बिलासपुर, एक सितंबर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि अन्तरिक्ष और परमाणु विज्ञान आदि क्षेत्रों में भारत को कभी-कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असहयोग का सामना करना पड़ा लेकिन तमाम चुनौतियों के बावजूद हमारे कर्मठ वैज्ञानिकों तथा इंजीनियरों ने भारत की साख मजबूत की है।

बिलासपुर के गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने ये बात कही।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा, ''भारत ने चंद्रयान 3 अभियान को सफलता-पूर्वक सम्पन्न किया और सभी देशवासियों में उत्साह की लहर दौड़ गई। उस सफलता के पीछे वर्षों के परिश्रम से अर्जित योग्यता तथा लक्ष्य के प्रति निष्ठा तो थी ही, मार्ग में आने वाली रुकावटों और असफलताओं से हतोत्साहित हुए बिना आगे बढ़ते रहने की भावना भी थी।’’

उन्होंने कहा,‘‘ व्यक्तिगत जीवन में आगे बढ़ने का भी यही मूल मंत्र है – निरंतर परिश्रम से अर्जित दक्षता, लक्ष्य के प्रति निष्ठा तथा तात्कालिक चुनौती या असफलता से सीख लेकर आगे बढ़ते रहने का जज्बा।''

राष्ट्रपति ने कहा, ''राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पृष्ठभूमि का उदाहरण देकर मैं व्यक्तिगत जीवन में उसकी सार्थकता को रेखांकित करना चाहूंगी। आज भारत अपने वैज्ञानिकों तथा इंजीनियरों के अथक परिश्रम तथा प्रतिभा के बल पर विश्व के परमाणु क्लब तथा अंतरिक्ष क्लब का सम्मानित सदस्य है।’’

उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में जो भी अंतरराष्ट्रीय निर्णय लिए जाएंगे उसमें भारत की भूमिका रहेगी। अंतरिक्ष और परमाणु विज्ञान के क्षेत्रों में भारत को कभी-कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असहयोग का सामना भी करना पड़ा, लेकिन तमाम चुनौतियों के बावजूद हमारे कर्मठ वैज्ञानिकों तथा इंजीनियरों ने भारत की साख मजबूत की है।

दीक्षांत समारोह में सत्र 2021-22 की विभिन्न परीक्षाओं के स्नातक, स्नातकोत्तर आदि में उत्तीर्ण दो हजार नौ सौ 46 छात्र, छात्राओं को उपाधि दी गई।

राष्ट्रपति ने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों तथा उनके माता पिता को बधाई देते हुए विद्यार्थियों की सफलता में योगदान देने के लिए प्राध्यापकों तथा विश्वविद्यालय टीम के सदस्यों की सराहना की।

उन्होंने कहा, ''मुझे यह देखकर बहुत प्रसन्नता हुई है कि आज स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले 76 विद्यार्थियों में छात्राओं की संख्या 45 है, जो लगभग 60 प्रतिशत है। यह प्रदर्शन इस दृष्टि से और भी अधिक प्रभावशाली है कि कुल विद्यार्थियों में छात्राओं की संख्या लगभग 43 प्रतिशत है।’’

राष्ट्रपति ने कहा कि छात्राओं के बेहतर प्रदर्शन के पीछे उनकी अपनी प्रतिभा और लगन के साथ-साथ उनके परिजनों तथा इस विश्वविद्यालय की टीम का योगदान है और ‘‘ मैं छात्राओं की स्वर्णिम सफलता के लिए उनको बधाई देती हूं।’’

राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से महिला सशक्तीकरण के इस परिवर्तनकारी अभियान में सब का सहयोग और अधिक होना चाहिए ताकि छात्राओं की कुल संख्या भी छात्रों के बराबर हो सके।

उन्होंने कहा, ''आपके विश्वविद्यालय के आस-पास के क्षेत्र में आदिवासी समुदाय के लोगों की काफी बड़ी संख्या है। राज्य की लगभग एक-तिहाई आबादी जनजातीय समुदायों की है। जनजातीय समुदाय की समृद्ध संस्कृतियों से प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, सामुदायिक जीवन में समानता का भाव तथा महिलाओं की भागीदारी जैसे जीवन-मूल्यों को सीखा जा सकता है।''

राष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक विश्व में जो व्यक्ति, संस्थान और देश, विज्ञान और तकनीक को अपनाने में तथा नवाचार में आगे रहेंगे वे अधिक प्रगति करेंगे। विज्ञान और तकनीक के विकास में समुचित सुविधाओं, वातावरण और प्रोत्साहन का योगदान होता है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय परम्पराओं से जुड़े रहकर युवाओं द्वारा 21वीं सदी की चुनौतियों के अनुरूप विश्व-स्तरीय दक्षता प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।’’

मुर्मू ने कहा,‘‘ हमारे देश की परम्पराएं अत्यंत समृद्ध हैं और उन्हें बचाए रखने में अनेक विभूतियों के संघर्षों और प्रयासों का अमूल्य योगदान रहा है। इस विश्वविद्यालय के नाम का महत्व इसलिए और भी अधिक बढ़ जाता है कि इसी क्षेत्र में अवतरण करने वाले गुरु घासीदास जी ने ‘मनखे-मनखे एक समान’ अर्थात ‘सभी मनुष्य एक समान हैं’ का अमर और जीवंत संदेश प्रवाहित किया था।’’

उन्होंने कहा कि आज से लगभग 250 वर्ष पहले उन्होंने वंचितों, पिछड़ों और महिलाओं की समानता के लिए समाज सुधार का बीड़ा उठाया था। समानता और सामाजिक समरसता के उन आदर्शों पर चलकर ही आज के युवा संवेदनशीलता के साथ सबके हित के बारे में सोच सकते हैं और श्रेष्ठतर समाज का निर्माण कर सकते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा, ''रायपुर का हवाई अड्डा स्वामी विवेकानंद के गौरवशाली नाम से सुशोभित है। स्वामीजी लोगों को भय-मुक्त रहने की सलाह देते थे। उन्होंने खेल-कूद और शारीरिक स्वास्थ्य के महत्व को भी रेखांकित किया था।’’

उन्होंने कहा, ''आज की युवा-पीढ़ी को जिस वैश्विक परिवेश में आगे बढ़ना है, उसमें भारत की स्थिति बहुत मजबूत है तथा विश्व समुदाय के अग्रणी राष्ट्रों में हमारी गणना होती है। स्वामी विवेकानंद के अद्भुत उदाहरण से प्रेरणा लेकर आज की पीढ़ी को भारत का गौरव बढ़ाना है, देश को समावेशी समृद्धि की नई ऊंचाइयों तक ले जाना है।''

राष्ट्रपति ने कहा कि कुछ ही दिनों पहले, 15 अगस्त को ,स्वाधीनता दिवस का उत्सव मनाते हुए सभी देशवासियों ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में उत्साहपूर्वक भागीदारी की। अब हमारा तिरंगा चांद तक पहुंच गया है, चांद की सतह पर भारत ने ‘शिव-शक्ति’ की ऊर्जा पहुंचाई है।''

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, ''हमारा देश अमृत काल के आरंभिक चरण में है। अमृत काल कर्तव्य काल है। यदि प्रत्येक नागरिक, विशेषकर हमारे युवा, संविधान में उल्लिखित मूल कर्तव्यों का पालन करेंगे तो हमारे देश के समग्र विकास को गति मिलेगी।''

समारोह को राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति आलोक कुमार चक्रवाल और केंद्रीय जनजाति विकास राज्य मंत्री रेणुका सिंह समेत अनेक गणमान्य लोग मौजूद थे।

राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले बिलासपुर पहुंचने के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी रतनपुर में स्थित आदिशक्ति मां महामाया देवी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर देशवासियों की सुख-समृद्धि और प्रगति की कामना की।

राष्ट्रपति मुर्म दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर बृहस्पतिवार को रायपुर पहुंची थी। बृहस्पतिवार को उन्होंने रायपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।

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