विदेश की खबरें | भारत ने सुरक्षा परिषद में सुधार में देरी की आलोचना की; कहा-75 साल और खिंच सकती है प्रक्रिया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. सुरक्षा परिषद में सुधार पर अंतर-सरकारी वार्ता को अगले सत्र तक के लिए खिसकाने के संयुक्त राष्ट्र महासभा के फैसले के बीच, भारत ने इसे “जाया किया गया एक और मौका करार दिया है।”
संयुक्त राष्ट्र, 30 जून सुरक्षा परिषद में सुधार पर अंतर-सरकारी वार्ता को अगले सत्र तक के लिए खिसकाने के संयुक्त राष्ट्र महासभा के फैसले के बीच, भारत ने इसे “जाया किया गया एक और मौका करार दिया है।”
उसने कहा है कि सुरक्षा परिषद में सुधार की प्रक्रिया बिना किसी वास्तविक प्रगति के 75 साल और खिंच सकती है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने बृहस्पतिवार को उस मौखिक मसौदा प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसमें सुरक्षा परिषद में सुधार पर अंतर-सरकारी वार्ता को सितंबर में शुरू होने वाले (महासभा के) 78वें सत्र में जारी रखने का प्रावधान है। इस फैसले के साथ ही मौजूदा 77वें सत्र में इस अंतर-सरकारी वार्ता का अंत हो गया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने इस बात पर जोर दिया कि अंतर-सरकारी वार्ता को आगे खिसकाने का फैसला महज एक विचारहीन तकनीकी अभ्यास तक सीमित नहीं रह जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हम वार्ता को तकनीकी आधार पर टालने के फैसले को उस प्रक्रिया में जान फूंकने की एक और जाया कोशिश के तौर पर देख रहे हैं, जिसमें पिछले चार दशक में जीवंतता या प्रगति के कोई संकेत नहीं मिले हैं।”
कंबोज ने स्पष्ट किया कि भारत सिर्फ संयुक्त राष्ट्र महासभा के 77वें सत्र के अध्यक्ष कसाबा कोरोसी के निजी प्रयासों को मान्यता देने के लिए मसौदा प्रस्ताव को स्वीकार करने की आम सहमति का हिस्सा बना।
उन्होंने कहा कि अब यह स्पष्ट है कि अंतर-सरकारी वार्ता संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के मौजूदा ढांचे और तौर-तरीकों में बिना किसी वास्तविक सुधार के, अगले 75 साल के लिए और खिंच सकती है।
कंबोज ने कहा, “भारत संयुक्त राष्ट्र के एक जिम्मेदार और रचनात्मक सदस्य के रूप में अपने सुधारवादी साझेदारों के साथ निश्चित रूप से इस प्रक्रिया में शामिल होता रहेगा। वह बार-बार दोहराए जाने वाले भाषणों के बजाय दस्तावेज आधारित सार्थक वार्ता की दिशा में काम करता रहेगा।”
उन्होंने कहा, “हालांकि, हममें से जो लोग संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जल्द एवं व्यापक सुधार की अपनी नेताओं की प्रतिबद्धता को वास्तव में पूरा करना चाहते हैं, उनके लिए अंतर-सरकारी वार्ता से परे देखना ही भविष्य में एक ऐसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थापना के लिए एकमात्र व्यवहार्य मार्ग के रूप में नजर आता है, जो आज की दुनिया को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करता है।”
वार्ता को आगे खिसकाने के फैसले का जिक्र करते हुए कंबोज ने कहा कि इस प्रक्रिया से संयुक्त राष्ट्र महासभा में हर साल निकलने वाले औपचारिक निष्कर्षों के मद्देनजर इसमें पूरे वर्ष सदस्य देशों के बीच हुए विचार-विमर्श से मिली प्रगति को भी शामिल और प्रतिबिंबित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत प्रक्रिया की वेबकास्टिंग और डिजिटल संरक्षण की शुरुआत के मद्देनजर इस मांग के छोटे-से हिस्से को स्वीकार करने के संयुक्त राष्ट्र अध्यक्ष के प्रयासों से उत्साहित है।
कोरोसी ने अपने संबोधन में कहा कि इन अंतर-सरकारी वार्ताओं के इतिहास में पहली बार बैठकों के पहले हिस्से को अब वेबकास्ट किया जा रहा है और वार्ता प्रक्रिया के निष्कर्षों को सहेजने के लिए सुरक्षा परिषद में सुधार को समर्पित एक वेबसाइट तैयार की गई है।
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(The above story first appeared on LatestLY on Jun 30, 2023 01:54 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

