देश की खबरें | वैश्विक लैंगिक सूचकांक में आठ पायदान चढ़कर भारत 127वें स्थान पर पहुंचा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. लैंगिक समानता के मामले में भारत का स्थान 146 देशों में 127वां हो गया है। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक लैंगिक अंतराल रिपोर्ट, 2023 के अनुसार भारत की स्थिति में पिछले साल की तुलना में आठ स्थान का सुधार हुआ है।

नयी दिल्ली, 21 जून लैंगिक समानता के मामले में भारत का स्थान 146 देशों में 127वां हो गया है। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक लैंगिक अंतराल रिपोर्ट, 2023 के अनुसार भारत की स्थिति में पिछले साल की तुलना में आठ स्थान का सुधार हुआ है।

डब्ल्यूईएफ ने 2022 की अपनी रिपोर्ट में वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक में भारत को 146 में 135वें स्थान पर रखा था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछली बार से भारत की स्थिति में 1.4 प्रतिशत अंकों और आठ स्थानों का सुधार हुआ है और यह 2020 के समानता स्तर की ओर आंशिक रूप से पहुंचा है।

रिपोर्ट के अनुसार देश में शिक्षा के सभी स्तरों पर पंजीकरण में समानता प्राप्त की है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने अपने 64.3 प्रतिशत लैंगिक अंतराल को पाट दिया है। हालांकि, इसमें रेखांकित किया गया है कि आर्थिक सहभागिता और अवसर को लेकर भारत केवल 36.7 प्रतिशत समानता के स्तर पर पहुंचा है।

इस सूचकांक में भारत के पड़ोसी देशों-पाकिस्तान का स्थान 142वां है जबकि बांग्लादेश का 59वां स्थान, चीन का 107वां स्थान, नेपाल का 116वां स्थान, श्रीलंका का 115वां स्थान और भूटान का 103वां स्थान है।

आइसलैंड लगातार 14वें साल दुनिया का सबसे अधिक लैंगिक समानता वाला देश बना हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में जहां महिलाओं के वेतन और आय के मामले में थोड़ी वृद्धि हुई है, वहीं वरिष्ठ पदों और तकनीकी भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी पिछली रिपोर्ट के बाद से मामूली कम हुई है।

राजनीतिक सशक्तीकरण पर, भारत ने 25.3 प्रतिशत समानता हासिल की है, जिसमें सांसदों में 15.1 महिलाएं हैं। यह 2006 में आई पहली रिपोर्ट के बाद से देश में महिला सांसदों की सर्वाधिक संख्या है।

केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इस साल की शुरुआत में कहा था कि डब्ल्यूईएफ को अपनी लैंगिक अंतराल रिपोर्ट में स्थानीय सरकारी निकायों में महिलाओं की भागीदारी का आकलन करना होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लिए जन्म के समय लिंगानुपात में 1.9 प्रतिशत अंक की वृद्धि से एक दशक तक धीमी प्रगति के बाद समानता बढ़ी है।

रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण एशिया क्षेत्र ने 63.4 प्रतिशत लैंगिक समानता हासिल की है और यह आठ क्षेत्रों में दूसरी सबसे कम लैंगिक समानता है।

साल 2006 से हो रहे इस अध्ययन में शामिल देशों के निरंतर नमूने के आधार पर पिछले संस्करण की तुलना में दक्षिण एशिया के आंकड़े में 1.1 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई है। यह सुधार आंशिक रूप से भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे अधिक आबादी वाले देशों के आंकड़े में वृद्धि के लिए जिम्मेदार है।

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