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जरुरी जानकारी | निजी निवेश में तेजी से वृद्धि के मोर्चे पर वैश्विक जोखिमों से पार पा सकता भारत: वित्त मंत्रालय

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जरुरी जानकारी | निजी निवेश में तेजी से वृद्धि के मोर्चे पर वैश्विक जोखिमों से पार पा सकता भारत: वित्त मंत्रालय

नयी दिल्ली, 26 मार्च वित्त मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि निजी निवेश में तेजी लाने की जरूरत है। इससे देश को बाहरी कारणों से वृद्धि के रास्ते में उत्पन्न जोखिमों को दूर करने में मदद मिल सकती है।

मंत्रालय ने एक रिपोर्ट में कहा कि निजी क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती और इसके निरंतर वृद्धि परिदृश्य से राहत मिलनी चाहिए।

आर्थिक मामलों के विभाग की तरफ से जारी मासिक आर्थिक समीक्षा के फरवरी संस्करण में कहा गया, ‘‘यह आवश्यक है कि उद्योग अपने निवेश व्यय और उपभोग मांग के बीच सह-संबंध को पहचाने।’’

रिपोर्ट के मुताबिक, आयकर में राहत और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नीतिगत दर में कटौती से उपभोग में तेजी आने की उम्मीद है। निजी क्षेत्र को इन कदमों से संकेत लेना चाहिए और क्षमता विस्तार की दिशा में निवेश करना शुरू करना चाहिए।

इसमें कहा गया है कि भारत की ठोस बुनियाद और आर्थिक संभावनाओं पर केंद्रित घरेलू निजी क्षेत्र का पूंजी निर्माण वित्त वर्ष 2025-26 में आर्थिक वृद्धि का एक महत्वपूर्ण चालक होगा।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘व्यक्तिगत आयकर ढांचे में प्रस्तावित बदलावों से मध्यम वर्ग के पास खर्च योग्य आय और उनकी खपत में सुधार होने की उम्मीद है। फरवरी में नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती के साथ नकदी बढ़ाने के उपाय अधिक उदार मौद्रिक नीति वृद्धि की गति को बढ़ा सकते हैं।’’

मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय बजट में दीर्घकालिक विकास को गति देने के उपायों और सुधारों पर ध्यान दिया गया है, जो कि विकसित भारत की महत्वाकांक्षा के इर्द-गिर्द है। यह महत्वपूर्ण वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू आर्थिक मजबूती को लेकर भरोसे को बढ़ाता है।

रिपोर्ट में मुद्रास्फीति के बारे में कहा गया है कि खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट के कारण फरवरी, 2025 में यह सात महीने के निचले स्तर पर आ गई है।

वित्त वर्ष 2024-25 में खाद्यान्नों के रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद से आने वाले महीनों में खाद्य मुद्रास्फीति को कम करने में मदद मिलेगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बाह्य मोर्चे पर, प्रमुख वस्तुओं के निर्यात में उल्लेखनीय मजबूती देखने को मिली है, जो वित्त वर्ष 2024-25 (अप्रैल से फरवरी) के दौरान 8.2 प्रतिशत की दर से बढ़ा है।

सकल एफडीआई प्रवाह मजबूत बना हुआ है। यह वित्त वर्ष 2024-25 (अप्रैल से जनवरी) के दौरान 12.4 प्रतिशत बढ़ा है। विदेशी मुद्रा भंडार 11 महीने से अधिक के आयात बिल को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर तनावों और व्यापार नीति गतिविधियों से उत्पन्न अनिश्चितता से प्रभावित है।

इसमें कहा गया है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि में तेजी आई, जो निजी खपत में सुधार और मुख्य वस्तुओं (गैर-तेल, गैर-सर्राफा) के निर्यात में वृद्धि के कारण हुई।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘कृषि गतिविधियों में तेजी से ग्रामीण मांग को समर्थन मिला है। आर्थिक गतिविधियों के बारे में बताने वाले महत्वपूर्ण आंकड़ें वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में बेहतर विकास गति का संकेत देते हैं। इन आंकड़ों में ईवे बिल में वृद्धि दहाई अंक में है और पीएमआई सूचकांक में विस्तार जारी है।’’

इसमें कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर व्यापक चुनौतियों के बावजूद देश की आर्थिक वृद्धि दर 2024-25 में 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। निर्यात वृद्धि, चुनावों के बाद सरकारी पूंजीगत व्यय में तेजी और कुंभ मेले से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों से वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में वृद्धि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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(The above story first appeared on LatestLY on Mar 26, 2025 05:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).