देश की खबरें | भारत, बांग्लादेश ने भूमि बंदरगाह मुद्दों पर चर्चा की; बेहतर सीमा सुविधाओं के लिए प्रतिबद्ध

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नयी दिल्ली, 12 नवंबर भारत और बांग्लादेश ने 4,096 किलोमीटर लंबी साझा अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित विभिन्न भूमि बंदरगाहों और जांच चौकियों पर बुनियादी ढांचे के निर्माण एवं परिचालन दक्षता के विकास में सहयोग बढ़ाने का मंगलवार को फैसला किया।

दोनों देशों ने नयी दिल्ली में बांग्लादेश भूमि बंदरगाह प्राधिकरण (बीएलपीए) और भारतीय भूमि बंदरगाह प्राधिकरण (एलपीएआई) की छठी उपसमूह बैठक के दौरान यह प्रतिबद्धता जताई। एलपीएआई केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।

इस द्विपक्षीय बैठक का उद्देश्य संबंधों को मजबूत करना और दोनों देशों के बीच सीमा पार बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और व्यापार की सुविधा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व एलपीएआई सदस्य (योजना और विकास) संजीव गुप्ता ने किया। प्रतिनिधिमंडल में गृह मंत्रालय, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), विदेश मंत्रालय और सीमा शुल्क विभाग के सीमा प्रबंधन प्रभाग के अधिकारी शामिल थे।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, "नवंबर 2023 में ढाका में आयोजित पिछली उपसमूह बैठक में हुई चर्चाओं को आगे बढ़ाते हुए बैठक में पिछली पहलों पर हुई प्रगति की समीक्षा की गई और भूमि बंदरगाहों पर बुनियादी ढांचे एवं परिचालन दक्षता को बढ़ाने के लिए सहयोग के लिए नये क्षेत्रों की पहचान की गई।"

बयान के मुताबिक, बैठक में जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई, उनमें गेडे (पश्चिम बंगाल) और भोलागंज (मेघालय) में बंदरगाह सुविधाएं विकसित करना, पेट्रापोल (पश्चिम बंगाल) और अगरतला (त्रिपुरा) में बांग्लादेश के निर्यात जहाजों की निकासी में तेजी लाना, भूमि बंदरगाहों और एकीकृत जांच चौकियों (आईसीपी) के विकास को प्राथमिकता देना और भोमरा (पश्चिम बंगाल) में एक साझा कार्गो गेट बनाना शामिल है।

बयान के अनुसार, बैठक में नेपाल और भूटान तक इन देशों के बुरीमारी और बंगलाबांधा बंदरगाहों के माध्यम से निर्यात सामग्री ले जाने वाले बांग्लादेशी ट्रक की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने, सबरूम (त्रिपुरा) में भूमि बंदरगाह को चालू करने, तेगामुख (बांग्लादेश)-कावरपुइचुआ (मिजोरम) बंदरगाह को विकसित करने और चौबीस घंटे सक्रिय रहने वाले बंदरगाह स्थापित करने पर भी चर्चा हुई।

इसमें कहा गया है कि बैठक में दोनों पक्षों ने भारत-बांग्लादेश संबंधों को "गहरा" करने, द्विपक्षीय व्यापार में इजाफा करने और "सहयोगात्मक" सीमा प्रबंधन के जरिये क्षेत्रीय कनेक्टिविटी एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के अपने साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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