नयी दिल्ली, 24 जुलाई विपक्षी गठबंधन 'इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के घटक दलों ने मानसून सत्र के तीसरे दिन, सोमवार को भी मणिपुर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से संसद के दोनों सदनों में बयान देने और चर्चा की मांग जारी रखी।
इन पार्टियों के सदस्यों ने अपनी इस मांग को लेकर संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई विपक्षी सांसदों ने उच्च सदन में कार्य स्थगन के प्रावधान वाले नियम 267 के तहत मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा करने और प्रधानमंत्री मोदी के बयान की मांग करते हुए नोटिस दिए।
खरगे के अलावा आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा, कांग्रेस के सैयद नासिर हुसैन और कुछ अन्य विपक्षी सदस्यों ने भी इसी विषय पर कार्यस्थगन नोटिस दिए।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी, मणिकम टैगोर और कुछ अन्य विपक्षी सांसदों ने मणिपुर के मामले पर प्रधानमंत्री मोदी के बयान और चर्चा की मांग करते हुए सोमवार को लोकसभा में कार्यस्थगन के नोटिस दिए।
संसद परिसर में हुए विपक्षी सांसदों के विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, जनता दल (यूनाइटेड) के राजीव रंजन सिंह उर्फ़ ललन सिंह, तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी, द्रमुक के टी आर बालू, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा और अन्य पार्टियों के सांसद शामिल हुए।
विपक्ष के सांसदों ने हाथों में एक बड़ा बैनर ले रखा था जिस पर प्रधानमंत्री से संसद के दोनों सदनों में मणिपुर के मुद्दे पर बयान देने की मांग की गई थी। उन्होंने 'प्रधानमंत्री सदन में आओ' के नारे भी लगाए।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने संसद परिसर में ‘पीटीआई-’ के साथ बातचीत में कहा, ‘‘हमारी मांग है कि प्रधानमंत्री सदन में आएं और बयान दें। इस बयान पर हम चर्चा करने के लिए तैयार हैं। वह संसद के बाहर बात कर रहे हैं, लेकिन सदन में बयान नहीं दे रहे हैं। यह संसद का अपमान है।’’
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