देश की खबरें | बढ़ रहा धरती का ताप, शहरों की तरफ लोगों के विस्थापन का मुख्य कारक हो सकता है सूखा: अध्ययन
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. जलवायु और अधिक गर्म हो गई है और लोग स्थान बदलने के लिए मजबूर हैं, ऐसे में सूखा विस्थापन की मुख्य वजह बन सकता है और उम्मीद है कि शहरों की आबादी और बढ़ जाएगी। सकता था। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है जिसमें 72 देशों में 50 साल के दौरान हुए आंतरिक विस्थापन की प्रवृत्तियों का विश्लेषण किया गया है।
नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर जलवायु और अधिक गर्म हो गई है और लोग स्थान बदलने के लिए मजबूर हैं, ऐसे में सूखा विस्थापन की मुख्य वजह बन सकता है और उम्मीद है कि शहरों की आबादी और बढ़ जाएगी। सकता था। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है जिसमें 72 देशों में 50 साल के दौरान हुए आंतरिक विस्थापन की प्रवृत्तियों का विश्लेषण किया गया है।
यद्यपि देश के भीतर के विस्थापन या सीमा पार के पलायन को पारंपरिक रूप से आर्थिक या संघर्ष से संबंधित परिणाम के रूप में देखा जाता रहा है लेकिन हाल के वर्षों में लोगों के विस्थापन के लिहाज से पर्यावरणीय कारक अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।
शोधकर्ताओं ने कहा कि जैसे-जैसे सूखे के हालात बढ़ते हैं और क्षेत्र अधिक शुष्क होते जाते हैं, लोगों की आवाजाही तेज होती जाती है, जिससे अक्सर शहरी क्षेत्रों की ओर विस्थापन होता है। शहरों में अवसर कम हो सकते हैं लेकिन उन्हें अधिक स्थिर माना जाता है।
इटली के बोकोनी विश्वविद्यालय में ‘ग्रीन रिसर्च सेंटर’ के निदेशक और लेखक मार्को पेरकोको ने कहा, ‘‘जब लंबे समय तक सूखा जैसे पर्यावरणीय दबावों का सामना करना पड़ता है, तो कई लोग विस्थापन को अपना सबसे कम बुरा विकल्प मानते हैं।’’
जनगणना आधारित आंकड़ों का उपयोग करते हुए शोधकर्ताओं ने 1960 और 2016 के बीच 72 देशों में 1,07,840 लोगों के विस्थापन का विश्लेषण किया।
‘नेचर क्लाइमेट चेंज’ नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में लेखकों ने लिखा है, ‘‘हमने पाया है कि सूखे और शुष्कता में वृद्धि का आंतरिक विस्थापन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है, विशेष रूप से दक्षिणी यूरोप, दक्षिण एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया तथा दक्षिण अमेरिका के अति-शुष्क और शुष्क क्षेत्रों में।’’
ग्रामीण क्षेत्र, विशेष रूप से कृषि पर निर्भर क्षेत्र, जलवायु परिवर्तन के कारण सबसे अधिक प्रभावित पाए गए। शोधकर्ताओं ने कहा कि इन क्षेत्रों के समुदायों को भीषण होती सूखे की स्थिति के प्रभावों से जूझने की सबसे अधिक संभावना रहती है।
उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में कृषि आय का मुख्य स्रोत है वहां मिट्टी का सूखना और पानी की घटती आपूर्ति सीधे तौर पर आजीविका के साधन खत्म होने का कारण बनती है, जिससे लोग शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन करते हैं।
लेखकों ने जलवायु-प्रेरित विस्थापन के मूल कारणों पर ध्यान देने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया, जिसमें शहरी क्षेत्रों में सहायता प्रणालियों को बेहतर बनाने के लिए सक्रिय रणनीतियों को अपनाना शामिल है। उन्होंने उन नीतियों की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला जो ग्रामीण समुदायों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल होने में मदद करें जिससे विस्थापन की जरूरत संभवत: कम हो जाएगी।
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