देश की खबरें | कोविड-19 के बढ़ते मामलों के मद्देनजर त्वरित जांच की संख्या बढ़ाएं: अदालत
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नयी दिल्ली, 22 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को आप सरकार से कहा कि वह राष्ट्रीय राजधनी में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के चलते त्वरित जांच ‘रैपिड एंटीजन टेस्ट’ (आरएटी) की संख्या बढ़ाए।
न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने उल्लेख किया कि वर्तमान में प्रतिदिन की जा रही आरएटी जांच की संख्या की स्थिति ‘‘बहुत खराब’’ है क्योंकि यह दिल्ली सरकार द्वारा तय की गईं प्रतिदिन 22 हजार जांच के 50 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच पा रही।
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पीठ ने कहा, ‘‘यदि आप रैपिड एंटीजन टेस्ट की संख्या बढ़ा सकते हैं तो इसे देखिए। कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए आप जितना जल्द यह करेंगे, उतना बेहतर होगा।’’
स्वास्थ्य विभाग की ओर से पेश हुए दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता सत्यकाम ने कहा कि आरएटी प्रणाली 18 जून को शुरू की गई थी और यह परीक्षण के चरण में है।
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उन्होंने कहा कि यह जांच प्रणाली अभी ‘हॉट स्पॉट’ तथा निषिद्ध क्षेत्रों तक सीमित है।
सत्यकाम ने अदालत से कहा कि एक सप्ताह बाद आरएटी की संख्या में वृद्धि होगी।
उच्च न्यायालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करते हुए यह भी कहा कि आरएटी प्रणाली की निर्दिष्ट कोविड-19 अस्पतालों में भी अनुमति दी जानी चाहिए जिससे कि जांच संख्या में वृद्धि हो सके।
पीठ अधिवक्ता संजीव शर्मा के आवेदन पर विचार कर रही थी जिन्होंने कहा है कि ऐसे अनेक उदाहरण हैं जब गैर-कोविड रोगियों का ऑपरेशन करने या अन्य आपातकालीन प्रक्रिया को अंजाम देने से पहले उनकी कोविड-19 जांच कराई जानी आवश्यक होती है, लेकिन संबंधित अस्पताल ऐसी जांच नहीं कर पाते क्योंकि दिल्ली सरकार ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दे रखी है।
उच्च न्यायालय ने इसी मामले में पूर्व में निजी प्रयोगशालाओं से कहा था कि वे कोविड-19 जांच करने में अपने समक्ष आ रही कठिनाइयों के बारे में बताएं।
प्रयोगशालाओं ने 18 जून को अपनी कठिनाइयों से अदालत को अवगत कराया। इस पर अदालत ने उपराज्यपाल द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति से कहा कि वह उठाए गए मुद्दों को देखने और उनके समाधान के लिए दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को परामर्श दे।
पीठ ने सोमवार को दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को प्रयोगशालाओं द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा करने के लिए समिति की बैठक बुलाने तथा 26 जून को अगली सुनवाई के दौरान समिति की सिफारिशों से अदालत को अवगत कराने का निर्देश दिया।
शर्मा के आवेदन को अधिवक्ता राकेश मल्होत्रा की मुख्य याचिका के साथ दायर किया गया जिन्होंने कोविड-19 को लेकर त्वरित जांच करने और 48 घंटे के भीतर परिणामों की घोषणा किए जाने का आग्रह किया है।
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