देश की खबरें | मानसून के बाद पंजाब एवं हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं बढ़ीं, पिछले साल की तुलना में कम
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तर भारत से मानसून की वापसी के बाद पंजाब और हरियाणा में खेतों में पराली जलाने के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई लेकिन स्थिति पिछले साल की तुलना में अब तक हालात बेहतर हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के आंकड़ों से यह जानकारी सामने आयी।
नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर उत्तर भारत से मानसून की वापसी के बाद पंजाब और हरियाणा में खेतों में पराली जलाने के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई लेकिन स्थिति पिछले साल की तुलना में अब तक हालात बेहतर हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के आंकड़ों से यह जानकारी सामने आयी।
पंद्रह सितंबर से 10 अक्टूबर तक पंजाब में पराली चलाने की 764 घटनाएं दर्ज की गयीं जबकि पिछले साल इसी अवधि में ऐसी 2,586 घटनाएं सामने आयी थीं।
संबंधित अवधि में हरियाणा में पराली जलाने की 196 घटनाएं हुईं जबकि पिछले साल इस दौरान ऐसे 353 मामले सामने आये थे।
आईएआरआई आंकड़ा दर्शाता है कि छह अक्टूबर तक पराली जलाने की घटनाएं बहुत कम थीं। छह अक्टूबर को दक्षिण पश्चिम मानसून पश्चिमोत्तर भारत से लौटने लगा था।
पंजाब में एक अक्टूबर से पांच अक्टूबर तक पराली जलाने के बस 63 मामले सामने आये जबकि छह अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक ऐसे 486 मामले सामने आये।
इसी प्रकार हरियाणा में एक अक्टूबर से पांच अक्टूबर तक पराली जलाने के बस 17 मामले सामने आये जबकि छह अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक ऐसे 172 मामले सामने आये।
संस्थान के वैज्ञानिक विनय सहगल ने बताया कि अक्टूबर के पहले सप्ताह में पराली जलाने के कम मामले सामने आये और उसकी वजह यह थी कि मानसून की देर से वापसी के कारण फसल की कटाई विलंब से शुरू हुई।
उन्होंने जमीनी स्तर से प्राप्त रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, ‘‘यहां तक, जिन किसानों ने फसल कटाई कर ली थी उन्होंने भी पराली नहीं जलायी, क्योंकि वह गीली थी।
सहगल ने कहा कि आईएआरआई को उम्मीद है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस सीजन में पराली जलाने की घटनाएं कम होंगी।
उन्होंने कहा, ‘‘ सरकार इस बार पराली प्रबंधन को लेकर अधिक सचेत है। यह भी पिछले साल बहुत सारे किसानों ने (कृषि कानूनों के विरोध में) में पराली जलायी थी।’’
सहगल ने कहा कि पराली जलाने की घटनाएं छह अक्टूबर से बढ़ी हैं लेकिन दैनिक आंकड़े 2020 की तुलना में अब भी कम हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों में 2016 से 2019 तक पराली जलाने के मामले कम होते गये और पिछले साल उसमें वृद्धि की वजह कृषकों का प्रदर्शन हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘ हम 2019 से बेहतर की आस नहीं कर सकते लेकिन उम्मीद है कि पिछले साल की तुलना में आंकड़े कम होंगे।’’
पंजाब में पहली अक्टूबर से 30 नवंबर तक 2016 में पराली जलाने की 1.02 लाख, 2017 में 67,079 , 2018 में 59,684 और 2019 में 59,684 घटनाएं हुई थी। उसी प्रकार, हरियाणा में पहली अक्टूबर से 30 नवंबर तक 2016 में पराली जलाने की 15,686 , 2017 में 13,085 , 2018 में 9,225 और 2019 में 6,364 और 2020 में 5,678 घटनाएं हुई थीं। पंजाब और हरियाणा अक्टूबर एवं नवंबर में धान की फसल की कटाई के दौरान पराली जलाने के कारण लोगों का ध्यान आकृष्ट करते हैं।
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