ताजा खबरें | पिछले तीन वर्ष में देश में पटरियों से ट्रेनों के उतरने की 87 घटनाएं सामने आईं

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. सरकार ने बुधवार को लोकसभा को बताया कि देश में पिछले करीब तीन वर्षों में पटरियों से ट्रेनों के उतरने की 87 घटनाएं सामने आई हैं तथा ऐसी घटनाओं से बचने एवं रेल संरक्षा सुधार के लिये कई कदम उठाये गए हैं।

नयी दिल्ली, 20 जुलाई सरकार ने बुधवार को लोकसभा को बताया कि देश में पिछले करीब तीन वर्षों में पटरियों से ट्रेनों के उतरने की 87 घटनाएं सामने आई हैं तथा ऐसी घटनाओं से बचने एवं रेल संरक्षा सुधार के लिये कई कदम उठाये गए हैं।

लोकसभा में नामा नागेश्वर राव के प्रश्न के लिखित उत्तर में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा पेश किये गए आंकड़ों से यह जानकारी मिली है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019-20 में पटरियों से ट्रेनों के उतरने की 40 घटनाएं, वर्ष 2020-20 में 17 घटनाएं तथा वर्ष 2021-22 में 27 घटनाएं सामने आईं। वर्ष 2022-23 में 11 जुलाई 2022 तक पटरियों से ट्रेनों के उतरने की 3 घटनाएं सामने आई हैं।

रेल मंत्री ने कहा कि मानव विफलता के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को समाप्त करने के लिये 31 मई 2022 तक 6,261 स्टेशनों पर प्वाइंटों और सिग्नलों के केंद्रीकृत परिचालन सहित इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली की व्यवस्था की गई है।

वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेल ने टक्करों को रोकने के लिये स्वदेशी स्वचालित गाड़ी सुरक्षा प्रणली ‘कवच’ विकसित की है। इसके अतिरिक्त लोको पायलटों की सतर्कता सुनिश्चित करने के लिये सभी रेल इंजनों में सतर्कता नियंत्रण उपकरण लगाए गए हैं।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष (आरआरएसके) को वर्ष 2017-18 में पांच वर्षों के लिये 1 लाख करोड़ रूपये के कोष के साथ महत्वपूर्ण संरक्षा परिसम्पत्तियों के प्रतिस्थापन/नवीनीकरण/उन्नयन के लिये शुरू किया गया था जिसका वार्षिक परिव्यय 20,000 करोड़ रूपये है। वित्त वर्ष 2022-23 से शुरू होकर इसे पांच वर्ष की अवधि के लिये आगे बढ़ाया गया है।

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