ताजा खबरें | हिंसा प्रभावित मणिपुर के बजट में लगभग सभी मदों में कटौती की गई : विपक्ष

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नयी दिल्ली, 17 मार्च विपक्षी दलों के सदस्यों ने सोमवार को राज्यसभा में कहा कि केंद्र को देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में ‘‘डबल इंजन’’ सरकार के योगदान के बारे में बताना चाहिए। साथ ही, विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि हिंसा प्रभावित मणिपुर राज्य के बजट में लगभग सभी मदों में कटौती की गई है, जबकि वहां पुनर्निर्माण कार्यों के लिए बजट बढ़ाया जाना चाहिए था।

केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उन राज्यों की सरकारों को ‘‘डबल इंजन’’ की सरकार कहती है जिन राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं।

विनियोग (संख्याक 2) विधेयक 2025 , मणिपुर विनियोग (लेखानुदान) विधेयक 2025, और बजट मणिपुर, 2024 पर चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों के साथ सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है।

चर्चा में हिस्सा लेते हुए द्रमुक सदस्य आर गिरिराजन ने आरोप लगाया कि मनरेगा में तमिलनाडु को गहरी कटौती का सामना करना पड़ रहा है जबकि यह योजना राज्य के लिए बेहद उपयोगी है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अक्सर ‘‘डबल इंजन’’ की सरकार की बात करती है लेकिन उसे बताना चाहिए कि डबल इंजन की सरकारें देश के जीडीपी में कितना योगदान देती हैं।

गिरिराजन ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष तमिलनाडु को शिक्षा के मद में उसकी बकाया राशि न देकर वहां के युवाओं को चुनौती दे रहा है।

उन्होंने कहा कि मणिपुर के नाम पर सरकार केवल छलावा कर रही है क्योंकि वहां के लोगों को जो घाव मिले हैं, वह कभी नहीं भरेंगे।

आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने कहा ‘‘मैंने जब सदन में यह मुद्दा उठाया था तब मुझे भारतीय संसदीय इतिहास में सबसे ज्यादा, 11 महीने तक संसद से निलंबित कर रखा गया।’’

उन्होंने कहा कि मणिपुर का बजट ऐसे समय में पेश किया गया, जब देश की अर्थव्यवस्था संकट से जूझ रही है, (केंद्र की) नरेन्द्र मोदी सरकार के कार्यकाल में 186 लाख करोड़ रुपये का कर्ज देश पर है, बेरोजगारी चरम पर है।

उन्होंने तंज किया, ‘‘सरकार को ‘म’ शब्द से बहुत प्यार है, लेकिन उन्हें मणिपुर की याद नहीं आती। राज्य में विधायकों तक के घर जला दिये गए, आम लोगों के घर जला दिये गए, लेकिन आज तक प्रधानमंत्री को वहां जाने का समय नहीं मिला।’’

सिंह ने केंद्र पर मणिपुर सरकार की मदद करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा हाल ही में एक समाचार वेबसाइट ने एक कथित ऑडियो जारी किया, जिसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘यह अत्यंत संवेदनशील मामला है। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन इस कथित ऑडियो के सामने आने के बाद लगाया गया ताकि असलियत सामने न आ सके।’’

उन्होंने कहा कि मणिपुर में जो तबाही मची है उसकी तुलना में मदद कितनी दी जा रही है। यह राज्य प्राकृतिक आपदा से भी प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य का बजट 34,899 करोड़ का 2024-25 में था आज वह 35,103 करोड़ रुपये का है। ‘‘यह विडंबना ही तो है।’’

सिंह ने कहा कि केंद्रीय योजनाओं के संदर्भ में भी मणिपुर को केवल कटौती ही मिल रही है।

उन्होंने कहा ‘‘आप औरंगजेब-औरंगजेब चिल्ला रहे हैं, जनता कह रही है कि कट गई जेब, कट गई जेब।’’

उन्होंने कहा ‘‘देश की संसद में मणिपुर के बजट पर चर्चा होना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह चर्चा तो मणिपुर की विधानसभा में होनी चाहिए थी।’’

केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि सदस्य अपने दावे को साबित करें अन्यथा उन्हें सदन से माफी मांगनी होगी।

वाईआरएस कांग्रेस पार्टी के बाबू राव गोला ने कहा कि आंध्रप्रदेश के विभाजन के समय उसे जो कुछ देने का वादा किया गया था वह आज तक नहीं दिया गया और ‘‘हर सत्र में हम यह मांग करते रहे हैं लेकिन सरकार ध्यान नहीं देती।’’

बीजू जनता दल की सुलता देव ने कहा कि लंबे समय से मणिपुर के मुद्दे पर चर्चा की मांग विपक्ष करता रहा है लेकिन कभी चर्चा नहीं की गई। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार यह स्पष्ट करे कि मणिपुर भारत में है या नहीं। न प्रधानमंत्री वहां गए और न ही उन लोगों को मणिपुर जाने दिया गया, जो वहां जाना चाहते थे।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मणिपुर नहीं गए लेकिन दो साल में वह कई बार विदेश जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मणिपुर के ही रास्ते में ओडिशा है फिर ‘‘डबल इंजन’’ की सरकार क्या मायने रखती है।

राजद के मनोज कुमार झा ने कहा ‘‘खुशी इस बात है कि आज मणिपुर महसूस कर रहा होगा कि वह इस देश का हिस्सा है। सुरक्षा का पहलू अहम है लेकिन यह देखना होगा कि उच्च न्यायालय के एक फैसले के बाद ही कैसे राज्य में हिंसा हुई। क्या इसका आकलन नहीं किया जाना चाहिए था?’’

उन्होंने कहा कि आपदा की दृष्टि से राज्य संवेदनशील है लेकिन इस मद में उसे केवल 50 करोड़ रुपये दिए गए। ‘‘हम गहन आकलन क्यों नहीं करते?’’

झा ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री मणिपुर जाते तो वहां के हालात शायद इतने नहीं बिगड़ते। राज्य के लिए शांति समिति बनाई गई जिसकी आज तक एक बैठक भी न हो सकी।

उन्होंने कहा कि वहां के राज्यपाल ने लोगों से हथियार लौटाने की अपील की लेकिन कितने हथियार लूटे गए थे और कितने लौटाए गए, यह कौन बताएगा।

झा ने कहा ‘‘अभी भी समय है। एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल मणिपुर जाए और वहां के लोगों के घावों पर मरहम लगाने का प्रयास किया जाए।’’

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