देश की खबरें | केंद्र ने दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा, ऑनलाइन गेमिंग के विनियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में

नयी दिल्ली, छह फरवरी केंद्र सरकार ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया कि ऑनलाइन गेमिंग के संबंध में मसौदा विनियम प्रसारित कर दिए गए हैं और वह उन्हें अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है।

केंद्र सरकार के अधिवक्ता ने मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ को बताया कि मसौदा विनियमों में संबंधित हितधारकों के साथ विचार-विमर्श शुरू हो गया है। पीठ ऑनलाइन गेमिंग के विनियमन के संबंध में अतुल बत्रा और अविनाश मेहरोत्रा की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

केंद्र के अधिवक्ता ने कहा, “मसौदा विनियम प्रसारित कर दिए गए हैं और विचार-विमर्श शुरू हो गया है। सभी प्रतिनिधियों के साथ, चाहे वो वकील हों या नागरिक समाज के सदस्य... दो दौर की हितधारक बैठक हो चुकी है। हम इन्हें अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं।”

केंद्र द्वारा यह जानकारी दिए जाने के बाद अदालत ने कहा कि वह मामले में आठ हफ्ते बाद सुनवाई करेगी।

उच्च न्यायालय ने पेशे से वकील बत्रा की याचिका पर सुनवाई बंद कर दी, जब उन्होंने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग के संबंध में विनियमों की मांग करने वाली उनकी याचिका पर किसी और आदेश की आवश्यकता नहीं है।

हालांकि, उसने बत्रा को कोई भी शिकायत होने की सूरत में अदालत का फिर से रुख करने की छूट दी।

बत्रा ने अपनी याचिका में कहा था कि जुए सरीखे ऑनलाइन खेलों को कौशल आधारित खेल के रूप में प्रचारित किया जा रहा है और ऑनलाइन जुआ किसी भी मादक पदार्थ की लत जितना ही बुरा है।

वहीं, वित्तीय सलाह सेवा मुहैया कराने का दावा करने वाले मेहरोत्रा ने अपनी याचिका में कहा कि भारत में ऑनलाइन जुआ प्रणाली अनियंत्रित है और यह ‘हवाला कारोबार एवं धन शोधन से जुड़ी गतिविधियों के संचालन के लिए एक मुफीद मंच’ है।

मेहरोत्रा ने इन वेबसाइट पर प्रतिबंध लगाने के अलावा, उन पर खेलने वाले और उन्हें संचालित करने वाले लोगों से बकाया करों की वसूली करने की मांग की है।

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