विदेश की खबरें | म्यामां में सेना ने अपने हाथ में लिया देश का नियंत्रण, सू ची को हिरासत में लिया गया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. सेना के स्वामित्व वाले मयावाडी टीवी ने सोमवार सुबह घोषणा की कि सेना ने एक साल के लिए देश का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। इस घोषणा के दौरान सेना के तैयार किए संविधान के उस हिस्से का हवाला दिया गया, जो राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में देश का नियंत्रण सेना को अपने हाथों लेने की इजाजत देता है।

सेना के स्वामित्व वाले मयावाडी टीवी ने सोमवार सुबह घोषणा की कि सेना ने एक साल के लिए देश का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। इस घोषणा के दौरान सेना के तैयार किए संविधान के उस हिस्से का हवाला दिया गया, जो राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में देश का नियंत्रण सेना को अपने हाथों लेने की इजाजत देता है।

उसने कहा कि तख्तापलट की वजह पिछले वर्ष नवंबर में हुए चुनावों में धोखाधड़ी के सेना के दावों पर कोई कदम नहीं उठाना तथा कोरोना वायरस संकट के बावजूद चुनाव स्थगित करने में सरकार की विफलता है।

सैन्य तख्तापलट की आशंका कई दिनों से बनी हुई थी। सेना ने अनेक बार इन आशंकाओं को खारिज किया था लेकिन देश की नई संसद का सत्र सोमवार को आरंभ होने से पहले ही उसने यह कदम उठा लिया।

म्यामां 1962 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग था तथा यहां पांच दशक तक सैन्य शासन रहा। हाल के वर्षों में लोकतंत्र कायम करने की दिशा में आंशिक लेकिन अहम प्रगति हुई थी लेकिन आज हुए तख्तापलट से इस प्रक्रिया को खासा झटका लगा है। सू ची के लिए तो यह और भी बड़ा झटका है जिन्होंने लोकतंत्र की मांग को लेकर वर्षों तक संघर्ष किया, वर्षों तक वह नजरबंद रहीं और अपने प्रयासों के लिए उन्हें नोबल शांति पुरस्कार भी मिला।

नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) ने पार्टी प्रमुख सू ची के फेसबुक पेज पर एक बयान जारी कर कहा है कि सेना के कदम अन्यायपूर्ण हैं और मतदाताओं की इच्छा एवं संविधान के विपरीत हैं। पार्टी ने म्यामां के लोगों से ‘‘तख्तापलट’’ और ‘‘सैन्य तानाशाही’’ कायम करने के प्रयासों का विरोध करने का आह्वान किया।

यह पुष्टि करना अभी संभव नहीं है कि फेसबुक पेज पर यह संदेश किसने डाला है क्योंकि पार्टी के सदस्य फोन कॉल का जवाब नहीं दे रहे हैं।

सेना के कदमों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक आलोचना हो रही है।

अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने कहा कि म्यामां की स्टेट काउंसलर सू ची एवं अन्य अधिकारियों समेत सरकार के नेताओं को कथित रूप से हिरासत में लिए जाने की घटना से अमेरिका बेहद चिंतित है।

ब्लिंकेन ने एक बयान में कहा, ‘‘हमने बर्मा की सेना से सभी सरकारी अधिकारियों और नेताओं को रिहा करने का आह्वान किया है और आठ नवंबर को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत हुए चुनावों में बर्मा की जनता के फैसले का सम्मान करने को कहा है। अमेरिका लोकतंत्र, स्वतंत्रता, शांति एवं विकास के आकांक्षी बर्मा के लोगों के साथ है। सेना को निश्चित रूप से इन कदमों को तुरंत पलटना चाहिए।’’

उन्होंने अपने बयान में म्यामां के पुराने नाम बर्मा का इस्तेमाल किया।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भी सू ची तथा अन्य नेताओं को सेना द्वारा हिरासत में लेने की कड़ी निंदा की तथा सत्ता सेना के हाथों में जाने पर चिंता जताई।

गुतारेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा, ‘‘म्यामां में नई संसद का सत्र आरंभ होने से पहले स्टेट काउंसलर आंग सान सू ची, राष्ट्रपति यू विन मिंत तथा अन्य राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लेने के कदम की महासचिव कड़ी निंदा करते हैं।’’

उन्होंने इसे म्यामां में लोकतांत्रिक सुधारों के लिए एक बड़ा झटका बताया।

नेपीता में फोन एवं इंटरनेट सेवाएं बंद हैं और सू ची की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी से संपर्क नहीं हो पा रहा है। ऐसी खबरें हैं कि देश के अन्य हिस्सों में भी फोन सेवाएं ठप हैं।

ऑनलाइन समाचार सेवा ‘इरावेडी’ ने एनएलडी के प्रवक्ता म्यू यूंट के हवाले से बताया कि सू ची और देश के राष्ट्रपति विन मिंत को तड़के ही हिरासत में ले लिया गया। उसने बताया कि पार्टी की केंद्रीय कार्यकारी समिति के सदस्य, सांसद और क्षेत्रीय मंत्रिमंडल के सदस्यों को भी हिरासत में लिया गया है।

कुछ राजनीतिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक फिल्मकार मिन तिन को को ग्यी, लेखक माउंग थार चो तथा 1988 में छात्र आंदोलनों का चेहरा रहे को को ग्यी तथा मिन को नाइंग को भी हिरासत में लिया गया है। हालांकि उन्हें हिरासत में लेने की खबर की अभी पुष्टि नहीं हो सकी है।

सेना के टीवी चैनल पर कहा गया कि कमांडर इन चीफ सीनियर जनरल मिन आंग लाइंग देश के प्रभारी होंगे तथा उप राष्ट्रपति मिंट स्वे को कार्यकारी राष्ट्रपति बनाया जा सकता है। स्वे पूर्व जनरल हैं और 2007 में उन्होंने बौद्ध भिक्षुओं के खिलाफ बर्बर कार्रवाई की थी।

पिछले वर्ष के चुनाव के बाद सोमवार को संसद का पहला सत्र आयोजित होने वाला था।

म्यामां की सेना ने बाद में घोषणा की कि वह एक साल के बाद देश में नए सिरे से चुनाव कराएगी। घोषणा में कहा गया है कि एक बार चुनाव होने के बाद सेना जीतने वाले को सत्ता की बागडोर सौंप देगी।

सू ची की नेशनल लीग ऑफ डेमोक्रेसी पार्टी ने पिछले साल नवंबर में हुए आम चुनाव में शानदार जीत दर्ज की थी। सू ची (75) देश की सबसे अधिक प्रभावशाली नेता हैं और सैन्य शासन के खिलाफ दशकों तक चले अहिंसक संघर्ष के बाद वह देश की नेता बनीं थीं ।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

GT vs MI, IPL 2026 30th Match Date And Time: कब और कितने बजे से खेला जाएगा गुजरात टाइटंस बनाम मुंबई इंडियंस के बीच रोमांचक मुकाबला? इस स्टेडियम में भिड़ेंगी दोनों टीमें, यहां जानें वेन्यू समेत मैच से जुड़ी सभी जानकारी

PBKS vs LSG, IPL 2026 29th Match Scorecard: चंडीगढ़ मुकाबले में पंजाब किंग्स ने लखनऊ सुपर जायंट्स को 54 रनों दी पटखनी, लगाया जीत का पंजा; यहां देखें मैच का स्कोरकार्ड

Will MS Dhoni Play in MI vs CSK IPL 2026 Match: मुंबई इंडियंस बनाम चेन्नई सुपरकिंग्स के मुकाबले से पहले बड़ी खबर, क्या आईपीएल 2026 में वापसी करेंगे एमएस धोनी? फिटनेस को लेकर आया अपडेट

Manipur Tension: मणिपुर में फिर बढ़ा तनाव, उखरुल में पूर्व सैनिक समेत दो की हत्या से हालात बिगड़े; संदिग्ध उग्रवादियों पर FIR दर्ज