देश की खबरें | राजस्थान के कई गांवों में फ्लोराइड की वजह से लोग सह रहे दिव्यांगता का दंश
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(उज्मी अतहर)
सांभर (राजस्थान), 15 जनवरी दो चचेरे भाई जिनकी उम्र क्रमश: 18 और छह साल हैं, पैरों के टेढ़ेपन और विकास अवरूद्ध होने की समस्या का सामना कर रहे हैं । वे दोनों ही अकेले इस समस्या से परेशान नहीं हैं क्योंकि उनके संयुक्त परिवार में कई बच्चे और बुजुर्ग भी जोड़ों के दर्द से ग्रस्त हैं। वे जानते हैं कि इन समस्याओं की जड़ में वह पानी है जो वे पी रहे हैं लेकिन कुछ कर नहीं सकते क्योंकि दूसरा कोई विकल्प ही नहीं है।
यह कहानी केवल सिंह परिवार की नहीं है बल्कि राजस्थान में स्थित भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील सांभर से करीब 80 किलोमीटर दूर सांभर ब्लॉक के देवपुरा और मूंदवाड़ा गांव के अन्य परिवारों की भी है। इनमें से अधिकतर निरक्षर हैं और झील के पानी को जिम्मेदार ठहराते हुए कहते हैं कि उसने भूजल को दूषित कर दिया है जिसकी वजह से पेयजल में खारेपन और फ्लोराइड की अधिकता है।
इलाके में काम करने वाली गैर सरकारी संस्था (एनजीओ) ग्राम चेतना केंद्र के प्रमुख ओम प्रकाश शर्मा के मुताबिक जयपुर से करीब 50 किलोमीटर दूर बसे इन दो गांवों में दिव्यांगता की दर प्रति एक हजार लोगों में से 10 है जबकि राष्ट्रीय औसत प्रति एक हजार पर पांच है, इस प्रकार यह सामान्य औसत से दोगुना है।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगता का सीधा संबंध इलाके में फ्लोराइड की उच्च मात्रा है औ इसकी पुष्टि अध्ययनों में भी हुई है।
दिल्ली स्थित फोर्टिस एस्कॉर्ट अस्पताल में जोड़ प्रत्यारोपण और हड्डीरोग विभाग के निदेशक डॉ. अमन दुआ बताते हैं कि अगर पानी में फ्लोराइड की मात्रा एक मिलीग्राम प्रति एक लीटर से अधिक है तो हड्डियां कमजोर होने लगती है।
उन्होंने‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘इससे हड्डियों में अंतर आने लगता है, जोड़ विकृत होने लगते हैं और इसका लक्षण खासतौर पर रीढ़ की हड्डियों में देखने को मिलता है जिससे नसों पर दबाव बढ़ सकता है और लंबे समय तक फ्लोराइड युक्त पानी का इस्तेमाल करने से पैर कमजोर हो जाते हैं।’’
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