नयी दिल्ली, तीन दिसंबर यह धारणा पूरी तरह गलत है कि निर्यात और आयात वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। थिंक टैंक जीटीआरआई ने रविवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि भारत को दुबई में चल रहे वैश्विक व्यापार और जलवायु परिवर्तन वार्ता (सीओपी28) में इस मुद्दे को उठाना चाहिए।
सीओपी28 में चार दिसंबर को वैश्विक व्यापार और जलवायु परिवर्तन के बीच संबंधों पर चर्चा की जाएगी। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) व्यापार दिवस कार्यक्रम का सह-नेतृत्व कर रहा है।
वैश्विक व्यापार अनुसंधान पहल (जीटीआरआई) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इसका पहला लक्ष्य दुनिया भर की सरकारों को अपनी राष्ट्रीय व्यापार नीतियों में जलवायु-अनुकूल उपायों को एकीकृत करने के लिए प्रेरित करना है।
रिपोर्ट में कहा गया कि चर्चा के अन्य विषयों में हरित व्यापार नीतियां, व्यापार में नवीकरणीय ऊर्जा की भूमिका और कार्बन मूल्य निर्धारण रणनीतियां शामिल हैं।
थिंक टैंक ने कहा, ''भारत को इस गलत धारणा को खत्म करना चाहिए कि व्यापार वैश्विक उत्सर्जन में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसे ठीक किया जाना चाहिए क्योंकि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में व्यापार-संबंधित गतिविधियों का हिस्सा केवल तीन प्रतिशत है, न कि 25 प्रतिशत, जैसा कि अक्सर बताया जाता है।''
जलवायु सम्मेलन का आयोजन 30 नवंबर से 12 दिसंबर तक दुबई एक्सपो सिटी में किया जा रहा है।
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