जरुरी जानकारी | सरसों, सोयाबीन, सीपीओ और पामोलीन में सुधार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों में तेजी के रुख से दिल्ली मंडी में मंगलवार को सरसों, सोयाबीन, सीपीओ और पामोलीन तेल- तिलहन के भाव में मजबूती रही जबकि अधिक फसल के बीच ऊंचे भाव के कारण मांग कमजोर होने से मूंगफली तेल-तिलहन और बिनौला तेल के भाव में गिरावट आई। बाकी भाव पूर्ववत बने रहे।

नयी दिल्ली, 26 अक्टूबर विदेशी बाजारों में तेजी के रुख से दिल्ली मंडी में मंगलवार को सरसों, सोयाबीन, सीपीओ और पामोलीन तेल- तिलहन के भाव में मजबूती रही जबकि अधिक फसल के बीच ऊंचे भाव के कारण मांग कमजोर होने से मूंगफली तेल-तिलहन और बिनौला तेल के भाव में गिरावट आई। बाकी भाव पूर्ववत बने रहे।

बाजार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में 0.85 प्रतिशत की तेजी थी जबकि शिकॉगो एक्सचेंज 0.2 प्रतिशत तेज है। उन्होंने कहा कि त्योहारी मांग होने और स्टॉक की कमी के कारण सरसों तेल-तिलहन में सुधार है जबकि सस्ता बैठने के कारण आम लोगों में विशेषकर गरीब लोग सरसों की जगह सोयाबीन और पाम तेल का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके साथ त्योहारी मांग की वजह से सोयाबीन तेल-तिलहन तथा सीपीओ और पामोलीन तेल कीमतों में सुधार आया। दूसरी ओर मंडियों में मूंगफली की नयी फसल की आवक बढ़ने तथा ऊंचे भाव पर मांग कमजोर होने से मूंगफली और बिनौला के भाव में गिरावट आई।

केन्द्र ने राज्य सरकारों से खाद्य तेलों की बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए ‘स्टॉक लिमिट’ (स्टॉक रखने की निश्चित सीमा) तय करने को कहा है। सूत्रों ने कहा कि राज्य सरकारों को इसके दायरे से मूंगफली और सोयाबीन को बाहर रखना चाहिये क्योंकि इससे मंडियों में नयी फसल लाने वाले किसानों को भारी नुकसान होगा।

सूत्रों ने कहा कि इस ‘स्टॉक लिमिट’ का हवाला देते हुए बड़े व्यापारी किसानों को अपनी उपज सस्ते में बेचने को मजबूर करेंगे जिन्हें अगली फसल की बुवाई के लिए जल्द से जल्द पैसे की जरुरत होती है। इन फसलों को किसानों के ही नाम से भंडारगृहों में रखा जायेगा क्योंकि किसानों पर यह ‘स्टॉक लिमिट’ लागू नहीं होती तथा कीमत बढ़ने पर बड़े व्यापारियों के लिए इसी स्टॉक से मुनाफे का द्वारा खुलने लगेगा।

उन्होंने कहा कि असली समस्या सोयाबीन डीगम और सीपीओ, पामोलीन, सूरजमुखी जैसे आयातित तेलों के प्रबंधन की है। सरकार को यह निगरानी रखनी होगी कि बड़ी कंपनियां इसे किस भाव से खरीद रही हैं और किस भाव पर बाजार में बेच रही हैं। यह भी निगरानी करने की जरुरत है कि आयात शुल्क में छूट का बराबर का लाभ उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है अथवा नहीं। यह समस्या की जड़ है कि बड़ी कंपनियों के खरीद बिक्री के भाव को निगरानी की जाये, सरकार को तेल की कीमतों को सस्ता करने की कुंजी यहीं से प्राप्त होगी।

उन्होंने कहा कि स्टॉक लिमिट के दायरे से मूंगफली और सोयाबीन को अलग रखना इसलिए भी जरुरी है क्योंकि इन फसलों केी मंडियों में आवक हो रही है और स्टॉक लिमिट का हवाला देकर भाव तोड़ा जायेगा। उन्होंने कहा कि ‘स्टॉक लिमिट’ आयातित तेलों (सोयाबीन, पामोलीन, सूरजमुखी) पर लागू नहीं होता और इसे ठीक से प्रबंधित करने की जरूरत है कि बड़ी कंपनियां इसे किस भाव पर खरीद रही हैं और गरीब उपभोक्ताओं के लिए खुदरा दुकानदारों को किस भाव बेच रही हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले आठ महीनों में सरसों की लगभग 88 प्रतिशत फसल की पेराई हो चुकी है और बाकी 12 प्रतिशत में कुछ हिस्सा किसानों के पास और बाकी बड़े खेतीहरों के पास है। अगली फसल आने में लगभग चार महीने हैं और बीच में जाड़े की मांग और त्योहारी मांग आने वाली है। सलोनी शम्साबाद में सरसों के भाव 9,100 रुपये से बढ़ाकर 9,250 रुपये क्विंटल कर दिये गये और इसी वजह से सरसों तेल-तिलहन कीमतों में सुधार है। हालांकि ऊंचे भाव होने के कारण इसकी मांग फिलहाल कमजोर है और यह गरीब उपभोक्ताओं की पहुंच से दूर हो गया है। मुंबई की बड़ी कंपनियों ने हरियाणा से 300 टन पक्की घानी तेल खरीदा है। उन्होंने कहा कि इस बार सरसों की उपलब्धता कम होने से सरसों खली की मांग है जो आगे और बढ़ने की उम्मीद है।

सूत्रों ने कहा कि वास्तव में सारे खर्च और देनदारी के बाद भी सोयाबीन तेल अधिकतम 135-140 रुपये के दायरे में होना चाहिये। इसी प्रकार सूरजमुखी तेल अधिकतम 135-140 रुपये लीटर और मूंगफली तेल अधिकतम 150-160 रुपये लीटर पड़ना चाहिये। लेकिन बड़ी तेल कंपनियां कटौती का महत्तम लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा पा रही हैं।

सूत्रों ने कहा कि सरकार को अधिक भाव पर बिक्री कर अनुचित लाभ कमाने वालों की सख्त निगरानी करनी होगी।

बाजार में थोक भाव इस प्रकार रहे- (भाव- रुपये प्रति क्विंटल)

सरसों तिलहन - 8,895 - 8,925 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये।

मूंगफली - 6,150 - 6,235 रुपये।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात)- 13,950 रुपये।

मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 2,040 - 2,165 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 17,910 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,695 -2,735 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,770 - 2,880 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 15,500 - 18,000 रुपये।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 14,050 रुपये।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,600 रुपये।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 12,580

सीपीओ एक्स-कांडला- 11,550 रुपये।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 13,800 रुपये।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 13,050 रुपये।

पामोलिन एक्स- कांडला- 11,850 (बिना जीएसटी के)।

सोयाबीन दाना 5,100 - 5,350, सोयाबीन लूज 4,950 - 5,050 रुपये।

मक्का खल (सरिस्का) 3,825 रुपये।

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