लॉकडाउन का प्रभाव: तमिलनाडु के छोटे मंदिरों ने बिजली के बिल माफ करने की अपील की
आरोप है कि पुजारियों और कर्मचारियों को लॉकडाउन के दौरान वेतन नहीं मिल रहा है।
चेन्नई, 18 मई तमिलनाडु के विभिन्न मंदिरों ने दो महीने से जारी लॉकडाउन से अपने राजस्व को हुए नुकसान का हवाला देते हुए बिजली के बिल माफ करने की और गांव के पुजारियों तथा कर्मचारियों का मुआवजा बढ़ाने की मांग की है।
आरोप है कि पुजारियों और कर्मचारियों को लॉकडाउन के दौरान वेतन नहीं मिल रहा है।
राज्य के 8,000 से अधिक ऐसे मंदिर हैं, जहां दिन में एक बार ही पूजा हो रही है और उनकी आमदनी भी कम है। ऐसे मंदिरों ने राज्य सरकार से बिजली के बिल माफ करने की अपील की है।
तमिलनाडु ग्रामीण मंदिर पुजारी संघ के अनुसार मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं है बल्कि इससे फूल बेचने वालों समेत कई लोगों की आजीविका चलती है।
संघ की राज्य इकाई के अध्यक्ष पी वासु ने कहा, ''मंदिर के पुजारी और कर्मचारी ही नहीं, बल्कि अपनी आजीविका के लिये धर्मस्थलों पर निर्भर फूल विक्रेता या पूजा थाली बेचने वाले भी लॉकडाउन के चलते सबसे बुरे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
तमिलनाडु के मंदिर 24 मार्च को लॉकडाउन लागू होने के बाद से दर्शन के लिये बंद हैं। इस दौरान मंदिरों में केवल पुजारी ही पूजा और अन्य गतिविधियां कर रहे हैं।
तमिलनाडु ग्रामीण मंदिर पुजारी संघ ने सरकार से उन्हें और मंदिर कर्मचारियों को मुहैया कराई जाने वाली राहत राशि में बढ़ोतरी की अपील की है। इसके अलावा उसने कम आमदनी वाले मंदिरों के बिजली के बिल माफ करने का भी आग्रह किया है।
संघ ने आग्रह किया है कि अकेले ग्रामीण मंदिर पुजारी कल्याण बोर्ड के ही 65,000 से अधिक सदस्य हैं, जिनकी कोविड-19 राहत राशि में इजाफा किया जाना चाहिये।
वासु ने कहा कि गांव के पुजारियों को 1,000 रुपये की सरकारी राहत प्रदान की गई है। हालांकि, यह राशि समान रूप से वितरित नहीं की जा रही है, जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिये।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 19, 2020 04:44 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

