देश की खबरें | आईआईटी के अनुसंधानकर्ताओं ने एलईडी उपकरणों के लिए श्वेत प्रकाश उत्सर्जक का डिजाइन तैयार किया

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नयी दिल्ली, 18 अक्टूबर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के अनुसंधानकर्ताओं ने सफलतापूर्वक श्वेत प्रकाश उत्सर्जक विकसित किया है जिसका उपयोग एलईडी उपकरणों में किया जा सकता है।

अनुसंधान टीम के अनुसार चूंकि पारंपरिक प्रकाश उत्सर्जक डायोड (एलईडी) सामग्री श्वेत प्रकाश का उत्सर्जन नहीं कर सकती है, इसलिए ऐसी सामग्री की दुनिया भर में खोज की गई है जो इन अप्रत्यक्ष तकनीक के बजाय सीधे श्वेत प्रकाश का उत्सर्जन कर सकती है। अनुसंधानकर्ताओं ने विरुपित ‘पेरोवस्काइट’ सामग्री का उपयोग कर एलईडी का उत्पादन करने की योजना बनाई है।

स्वदेशी रूप से विकसित चमकदार श्वेत प्रकाश उत्सर्जक पारंपरिक उच्च लागत वाली सामग्रियों का संभावित रूप से स्थान ले सकते हैं और प्रति लुमेन ऊर्जा लागत को असाधारण रूप से बचा सकते हैं। इस नवोन्मेष को अनुसंधानकर्ताओं ने पेटेंट कराया है और हाल में इसे ‘‘एसईआरबी-प्रौद्योगिकी ट्रांसलेशन अवार्ड’’ प्रदान किया गया है।

विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी) अनुसंधानकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान और विकास प्रयोगशालाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और अन्य एजेंसियों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। पेटेंट के अलावा इस अनुसंधान कार्य के परिणाम नेचर ग्रुप - कम्युनिकेशंस मैटेरियल्स से संबंधित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।

आईआईटी मद्रास के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर अरविंद कुमार चंडीरन ने कहा, ‘‘एलईडी लगभग सभी रंगों में उपलब्ध है, श्वेत प्रकाश एलईडी का विकास हाल में हुआ है। पारंपरिक एलईडी सामग्री श्वेत प्रकाश का उत्सर्जन नहीं कर सकती है और दूधिया सफेद रोशनी पैदा करने के लिए विशेष तकनीकों जैसे नीले एलईडी की पीले फॉस्फोर के साथ कोटिंग और नीले, हरे और लाल एलईडी के संयोजन का उपयोग किया जाता है।’’

चंडीरन ने कहा, ‘‘इन अप्रत्यक्ष तकनीक के बजाय सीधे सीधे सफेद रोशनी का उत्सर्जन करने वाली सामग्री की दुनिया भर में खोज की गई है। पारंपरिक एलईडी में इन अप्रत्यक्ष तकनीक से प्रभाव क्षमता में कमी आ सकती है।’’ टीम ने अपनी विरुपित पेरोवस्काइट सामग्री से एलईडी बनाने के लिए 30 लाख रुपये की अनुदान राशि का उपयोग करने का प्रस्ताव दिया है।

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