देश की खबरें | एक्स-रे से घुटने की ऑस्टियोऑर्थराइटिस की गंभीरता का पता लगाने पर काम कर रहा है आईआईटी गुवाहाटी

गुवाहाटी, 10 जुलाई भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), गुवाहाटी ने ‘डीप लर्निंग (डीएल)’ आधारित रूपरेखा तैयार की है, जो एक्स-रे चित्रों से घुटने के ऑस्टियोऑर्थराइटिस (ओए) की गंभीरता का स्वत: पता लगाने में कारगर हो सकती है।

‘डीप लर्निंग’ एक ‘मशीन लर्निंग’ तकनीक है, जो कंप्यूटर को वह करना सिखाती है, जो मनुष्य को स्वाभाविक रूप से आता है।

आईआईटी, गुवाहाटी की एक विज्ञप्ति के अनुसार, इस कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित मॉडल को ‘ऑस्टियो एचआर नेट’ नाम दिया गया है, जिससे ओए की गंभीरता के स्तर का पता लगाया जा सकता है और दूर बैठे चिकित्सकों को अधिक सटीक पहचान करने में मदद मिल सकती है।

विज्ञप्ति के अनुसार घुटने का ऑस्टियोऑर्थराइटिस दुनियाभर में मांसपेशियों और हड्डियों से जुड़ी सबसे आम समस्या है। भारत में यह 28 प्रतिशत व्याप्त है। इसका कोई उपचार नहीं है और समस्या के अग्रिम चरण में पहुंचने पर केवल पूरी तरह घुटना प्रतिरोपण ही किया जा सकता है, ऐसे में पीड़ा कम करने के लिए जल्द निदान आवश्यक है।

विज्ञप्ति के अनुसार, संस्थान के अनुसंधानकर्ता क्लीनिकल मूल्यांकन में मदद के लिए एक्स-रे चित्रों या रेडियोग्राफ से घुटने के ऑस्टियोऑर्थराइटिस के स्वत: निदान को और सुदृढ़ करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

आईआईटी, गुवाहाटी में कम्प्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर अरिजीत सुर ने कहा, ‘‘यह प्रस्तावित मॉडल एक्स-रे जैसे किफायती रेडियोग्राफिक तौर-तरीकों का विश्लेषण करने के लिए एक अच्छी शुरुआत साबित हो सकता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा समूह इस समय ध्यान दे रहा है कि किस तरह ‘डीप लर्निंग’ आधारित सक्षम मॉडल बनाये जा सकते हैं, ताकि हम बहुत कम रिजॉल्यूशन वाली रेडियोग्राफिक तस्वीरों या किसी स्मार्टफोन से रेडियोग्राफिक प्लेट की ली गयी तस्वीरों जैसी सस्ती और आसानी से उपलब्ध तकनीक पर काम कर सकते हैं।’’

इस तरह के विकार के प्रभावी निदान के लिए घुटनों के जोड़ों की एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी तकनीक हैं, जिनसे 3 डी छवि मिलती है। हालांकि, इनकी उपलब्धता की एक सीमा है और ये महंगी भी हैं। वहीं, एक्स-रे आर्थिक रूप से अधिक व्यावहारिक है तथा नियमित निदान के लिए बहुत प्रभावी है।

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