देश की खबरें | आईआईएम लखनऊ सीआरपीएफ जवानों में तनाव का अध्ययन करेगा,ड्यूटी-जीवन में संतुलन के लिए समाधान तलाशेगा

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नयी दिल्ली, 30 जनवरी भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम), लखनऊ सीआरपीएफ कर्मियों पर एक अध्ययन करेगा और उनके तनाव को दूर करने के लिए एक समाधान तलाशेगा।

दरअसल, तनाव के कारण बल के कर्मियों के आत्महत्या करने और उनके पारिवारिक जीवन प्रभावित होने की घटनाएं देखने को भी मिलती हैं।

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिदेशक ए पी माहेश्वरी ने ‘घरेलू सशक्तिकरण’ विषय पर आईआईएम, लखनऊ की अर्चना शुक्ला के साथ शनिवार को एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया है।

संस्थान के कुछ चुने हुए विशेषज्ञ शुरूआत में लखनऊ और इसके आसपास स्थित सीआपीएफ के स्थानों पर एक प्रायोगिक परियोजना पर काम करेंगे। इसके बाद, इस विषय पर एक पूर्ण शोध किये जाने की उम्मीद है।

सीआरपीएफ प्रवक्ता ने कहा, ‘‘इस प्रायोगिक परियोजना के परिणाम के अनुसार व्यापक प्रारूप को अंतिम रूप देने के लिए एक रणनीति बनाई जाएगी, जिसके तहत एक पूर्ण शोध किया जाएगा और उसका उद्देश्य प्रतिक्रिया का मूल्यांकन एवं आकलन करना होगा तथा उसके मुताबिक आगे की प्रक्रिया की जाएगी। ’’

बल में करीब सवा तीन लाख कर्मी हैं। इसके कर्मियों को मुख्य रूप से नक्सल रोधी, उग्रवाद रोधी, आतंकवाद रोधी अभियानों में लगाया जाता है। इसके अलावा कानून व्यवस्था कायम रखने की विभिन्न ड्यूटी में भी इनकी तैनाती की जाती है। आधिकारिक अनुमान के मुताबिक बल के 95 प्रतिशन से अधिक कर्मियों को किसी भी वक्त अभियानगत तैनाती के लिए तैयार रखा जाता है।

बल में इस कड़ी ड्यूटी के चलते कर्मियों में तनाव बढ़ जाता है, जिससे न सिर्फ वे प्रभावित होते हैं बल्कि इसका असर उनके परिवार पर भी देखने को मिलता है।

माहेश्वरी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किये गये ट्वीट में कहा, ‘‘ अधिक जोखिम वाले इलाकों में लंबे समय तक तैनाती के चलते जवानों एवं उनके परिवारों पर पड़ने वाले प्रभाव का किसी बाहरी एजेंसी द्वारा किया जाने वाला अपनी तरह का यह पहला अध्ययन है। ’’

सहमति पत्र में बयान में कहा गया है कि संयुक्त परिवार की व्यवस्था के टूटने और एकल परिवार का चलन बढ़ने ने भी जवानों के लिए वैकल्पिक समर्थन (मानसिक रूप से) प्रणाली की उपलब्धता को घटा दिया है।

प्रवक्ता के मुताबिक शुक्ला ने बल को आश्वस्त किया कि आइआईएम की टीम गहन शोध के बाद सार्थक सुझाव देगी।

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