देश की खबरें | वायरस ने व्यवहार बदला तो बच्चों में बढ़ सकता है कोविड का प्रभाव : सरकार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. सरकार ने आगाह किया है कि कोरोना वायरस संक्रमण का अभी तक भले ही बच्चों में गंभीर प्रभाव नहीं हुआ है, किंतु वायरस के व्यवहार या महामारी विज्ञान की गतिशीलता में परिवर्तन होने पर उनमें इसका प्रभाव बढ़ सकता है । इसके साथ ही सरकार ने कहा कि इस तरह की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयारी जारी है ।

Corona

नयी दिल्ली, एक जून सरकार ने आगाह किया है कि कोरोना वायरस संक्रमण का अभी तक भले ही बच्चों में गंभीर प्रभाव नहीं हुआ है, किंतु वायरस के व्यवहार या महामारी विज्ञान की गतिशीलता में परिवर्तन होने पर उनमें इसका प्रभाव बढ़ सकता है । इसके साथ ही सरकार ने कहा कि इस तरह की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयारी जारी है ।

नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वी के पॉल ने बताया, ''हम आपको पुन:आश्वस्त करते हैं कि बाल चिकित्सा आबादी की जरूरतों का प्रबंध किया जाएगा और कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी ।''

उन्होंने कहा, '' हम इस बात की समीक्षा करेंगे कि किसकी आवश्यकता है तथा स्थिति बहुत बिगड़ जाने पर किन चीजों की आवश्यकता होगी और उसे हम अमल में लाएंगे ।

पॉल ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा कि बच्चों में कोविड पश्चात मल्टी ​सिस्टम इन्फ्लामेट्री सिंड्रोम देखा गया है। बच्चों में संक्रमण से होने वाली जटिलताओं पर गौर करने के लिये एक राष्ट्रीय समूह का गठन किया गया है

उन्होंने कहा कि बच्चों में सामान्य तौर पर संक्रमण का लक्षण नहीं होता है या फिर बेहद कम लक्षण होते हैं ।

उन्होंने कहा, ''अगर वह संक्रमित हो जाते हैं, तो गंभीर हालात नहीं बनते है और अस्पताल भर्ती कराने की आवश्यकता दुर्लभ होती है ।''

पॉल ने कहा, ''वायरस यदि अपना व्यवहार बदलता है या फिर महामारी विज्ञान की गतिशीलता में परिवर्तन आता है तो बच्चों से संबंधित इस स्थिति में बदलाव आ सकता है । ऐसी स्थिति में ऐसा हो सकता है कि कोविड का प्रभाव बच्चों में बढ़ जाए ।’’

उन्होंने कहा कि बच्चों में कोविड के दो स्वरूप देखे गये हैं ।

उन्होंने कहा कि एक यह कि बच्चों को बुखार, उसके बाद कफ और बाद में सर्दी होती है । इससे निमोनिया हो जाता है जो बढता है और बिगड़ने लगता है तथा बच्चों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है ।

पॉल ने कहा, ''यह भी देखा गया है कि कोविड ठीक होने के दो से छह सप्ताह बाद कुछ बच्चों को दोबारा बुखार चढ़ता है, और आंखें सूज जाती हैं तथा दस्त, उलटी और रक्तस्राव की स्थिति बन जाती है ।... इसे मल्टी सिस्टम इन्फ्लामेट्री सिंड्रोम कहा जाता है ।''

उन्होंने कहा कि कोविड से संक्रमित दो से तीन प्रतिशत बच्चों को ही अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पड़ सकती है।

दूसरी ओर, दिल्ली के अस्पतालों ने कोरोना वायरस संक्रमण की संभावित तीसरी लहर से निपटने की योजना के तहत बच्चों के लिए आवश्यक उपकरण, दवाओं और आईसीयू बिस्तर की उपलब्धता सुनिश्चित करने के वास्ते आवश्यक बुनियादी ढांचे में सुधार करना शुरू कर दिया है।

दिल्ली सरकार ने बच्चों को तीसरी लहर से बचाने के उपाय सुझाने के लिए एक कार्य बल का गठन किया है। अधिकतर अस्पताल अपने आईसीयू बेड और बच्चों के लिए सुविधाओं को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं क्योंकि इस बात की आशंका है कि कोरोना वायरस संक्रमण की तीसरी लहर बच्चों के लिये घातक हो सकती है ।

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