देश की खबरें | यदि ‘इंडिया’ गठबंधन अपना नाम ‘भारत’ कर ले तो क्या भाजपा देश का नाम बदल देगी: केजरीवाल

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. जी20 रात्रिभोज के निमंत्रण पत्र पर राष्ट्रपति का उल्लेख ‘प्रेसीडेंट ऑफ भारत’ के तौर पर किए जाने से पैदा विवाद के बीच, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को सवाल किया कि यदि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) अपना नाम ‘भारत’ रख ले तो क्या भाजपा देश का नाम भारत से बदल कर कुछ और रख देगी।

नयी दिल्ली, पांच सितंबर जी20 रात्रिभोज के निमंत्रण पत्र पर राष्ट्रपति का उल्लेख ‘प्रेसीडेंट ऑफ भारत’ के तौर पर किए जाने से पैदा विवाद के बीच, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को सवाल किया कि यदि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) अपना नाम ‘भारत’ रख ले तो क्या भाजपा देश का नाम भारत से बदल कर कुछ और रख देगी।

कांग्रेस ने मंगलवार को दावा किया कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा राष्ट्रपति की ओर से भेजे गये जी20 रात्रिभोज के निमंत्रण पत्र पर ‘प्रेसीडेंट ऑफ भारत’ (भारत की राष्ट्रपति) लिखा है, न कि ‘प्रेसीडेंट ऑफ इंडिया’।

केजरीवाल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘इस बारे में मुझे कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है लेकिन मैंने अफवाहें सुनी हैं। यह कहा जा रहा है कि ऐसा इसलिए हो रहा है कि हमने ‘इंडिया’ नाम से गठबंधन बनाया है...देश 140 करोड़ लोगों का है, ना कि किसी एक पार्टी का। यदि ‘इंडिया’ गठबंधन अपना नाम बदलकर ‘भारत’ कर लेता है, तो क्या वे भारत नाम भी बदल देंगे?’’

आम आदमी पार्टी (आप) विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ का घटक दल है।

आप के राष्ट्रीय संयोजक केजरीवाल ने आरोप लगाया कि भाजपा गठबंधन से भयभीत है और यही कारण है कि वह इस तरह के बदलावों का सहारा ले रही है। उन्होंने इसे ‘देशद्रोह’ करार दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘यह क्या मजाक है! यह हमारा देश हे। हमारी एक प्राचीन संस्कृति है।’’

केजरीवाल ने कहा कि भाजपा विपक्षी गठबंधन से इतनी परेशान है कि जब पहली बार इसकी घोषणा की गई, तब उसने अपने ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ प्रस्ताव से लोगों का ध्यान इससे भटकाने की कोशिश की।

उन्होंने कहा, ‘‘विपक्षी गठबंधन के प्रति उनकी प्रतिक्रिया से यह प्रदर्शित होता है कि वे घबराये हुए हैं। उन्होंने ध्यान भटकाने के लिए ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की चाल चली। वे ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ कैसे करा सकते हैं? इससे लोगों को क्या फायदा होगा? इससे आपको और आपके परिवार को कैसे फायदा होगा? क्या इससे महंगाई, बेरोजगारी घटेगी?’’

आप नेता ने कहा कि भाजपा हर पांच साल पर एक चुनाव चाहती है क्योंकि लोगों के लिए काम करने का उसका कोई इरादा नहीं है और ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की महज एक चाल है।

उन्होंने कहा, ‘‘एक राष्ट्र, एक चुनाव से केवल एक फायदा होगा। अभी उन्हें हर छह महीने पर लोगों के बीच जाना पड़ता है और काम करना पड़ता है। इसके बाद, वे लोगों को पांच साल बाद ही नजर आएंगे।’’

केजरीवाल ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि यदि एक राष्ट्र, एक चुनाव होता है तो अगले चुनाव तक, रसोई गैस सिलेंडर 5,000 रुपये में बिकेगा और वे 200 रुपये की सब्सिडी देंगे तथा इसकी शेखी बघारेंगे। असल में, वे काम ही नहीं करना चाहते हैं।’’

आप के एक और नेता राघव चड्ढा ने कहा कि ‘‘हमारी राष्ट्रीय पहचान’’ भाजपा की निजी संपत्ति नहीं है।

उन्होंने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘...देश किसी एक राजनीतिक दल का नहीं है, यह करोड़ों भारतीयों का है। हमारी राष्ट्रीय पहचान भाजपा की निजी संपत्ति नहीं है कि वह इसमें बदलाव कर सकती है। जुड़ेगा भारत, जीतेगा इंडिया।’’

भाजपा के कई नेताओं ने अतीत में संविधान से ‘इंडिया’ शब्द हटाकर इसकी जगह ‘भारत’ करने की मांग की है।

हाल में संपन्न हुए संसद के मानसून सत्र के दौरान भाजपा सांसद नरेश बंसल ने राज्यसभा में कहा था कि ‘इंडिया’ नाम औपनिवेशिक गुलामी का प्रतीक है और इसे संविधान से हटा देना चाहिए।

इस साल जून में, उच्चतम न्यायालय ने इंडिया नाम बदल कर भारत करने की मांग वाली एक याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक सितंबर को गुवाहाटी में एक कार्यक्रम में जोर दिया था कि लोगों को इंडिया के बजाय भारत नाम का इस्तेमाल करना चाहिए।

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