देश की खबरें | इब्सा ने सुरक्षा परिषद के सुधार की ‘धीमी’ गति पर ‘नाखुशी ’ प्रकट की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के संगठन इब्सा ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार की ‘धीमी’ गति पर ‘नाखुशी ’ प्रकट की और कहा कि इस वैश्विक निकाय के विस्तार के लिए परिणामोन्मुखी प्रक्रिया की ओर बढ़ने का वक्त आ गया है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 16 सितंबर भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के संगठन इब्सा ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार की ‘धीमी’ गति पर ‘नाखुशी ’ प्रकट की और कहा कि इस वैश्विक निकाय के विस्तार के लिए परिणामोन्मुखी प्रक्रिया की ओर बढ़ने का वक्त आ गया है।

इन तीनों देशों ने सुरक्षा परिषद के सुधार को शीघ्र पूरा करने की दृढ़ मांग की और कहा कि ऐसा नहीं कर पाने से अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

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यह बयान तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की वीडियो कांफ्रेंस के बाद जारी किया गया। इस सम्मेलन में बातचीत मुख्य रूप से संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग पर केंद्रित रही । बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस जयशंकर ने की।

जयशंकर ने ट्वीट किया, ‘‘ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार पर संयुक्त बयान जारी किया गया। इस अंतर-सरकारी वार्ता में हम सभी ने सुधार की धीमी गति पर नाखुशी प्रकट की। एक समग्र पाठ पर औपचारिक प्रारूप को लेकर उल्लेखनीय वार्ता का वक्त आ गया है।’’

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ये तीनों ही देश सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के प्रबल दावेदार हैं।

इब्सा ने एक बयान में कहा, ‘‘ सुरक्षा परिषद में सुधार में विफलता के अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर गंभीर परिणाम होंगे। यह सुनिश्चित करने के लिए उल्लेखनीय और तीव्र सुधार अहम है कि यह संस्था अधिक प्रतिनिधिकारक, प्रभावी और जवाबदेह हो तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों एवं सिद्धांतों को पूरा करने में सक्षम रहे। ’’

सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य के रूप में भारत के निर्वाचन का हवाला देते हुए इब्सा ने कहा कि भारत इस मंच पर एक ‘मजबूत आवाज’ हेागा और वह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मुताबिक नियम आधारित व्यवस्था का रक्षक बना रहेगा।

विदेश मंत्रालय के अनुसार तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने शांति, सुरक्षा, आतंकवाद का मुकाबला, जलवायु परिवर्तन, संपोषणीय विकास, बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली समेत वैश्विक महत्व के विषयों पर चर्चा की।

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