देश की खबरें | ‘मैं व्यक्तिगत विषयों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं करता’: फडणवीस ने खडसे की टिप्पणी पर कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि उनके पास काफी धैर्य है और वह व्यक्तिगत विषयों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं करते।
मुंबई, 11 सितंबर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि उनके पास काफी धैर्य है और वह व्यक्तिगत विषयों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं करते।
दरअसल, फडणवीस पर उनकी ही पार्टी के असंतुष्ट नेता एकनाथ खडसे ने एक दिन पहले आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ लगाये गये आरोपों में उनका (फडणवीस का) ‘‘प्रत्यक्ष या परोक्ष’’ रूप से हाथ था।
यह भी पढ़े | Sudarshan TV: दिल्ली हाईकोर्ट ने सुदर्शन टीवी के ‘बिंदास बोल’ कार्यक्रम के प्रसारण को रोकने से किया मना.
हालांकि, फडणवीस ने खडसे की आलोचना करने से बचने की कोशिश की और कहा कि उनकी (खडसे की) जो कुछ शिकायत है उसे पार्टी के अंदर चर्चा कर हल किया जाएगा।
खडसे ने बृहस्पतिवार को कहा था कि वह एक पुस्तक के जरिये उस षडयंत्र का खुलासा करेंगे, जो 2016 में राज्य में फडणवीस नीत सरकार से उन्हें मंत्री पद से हटाये जाने के बारे में है।
यह भी पढ़े | DGCA: कंगना रानौत की विमान यात्रा के दौरान सुरक्षा का उल्लंघन, डीजीसीए ने IndiGo Airlines से मांगी रिपोर्ट.
खडसे (68) ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की नजरों में उन्हें भ्रष्ट व्यक्ति के रूप में दिखाने का माहौल बनाया गया।
फडणवीस ने नयी दिल्ली में संवाददातओं से कहा, ‘‘मेरे पास काफी धैर्य है और मैं व्यक्तिगत विषयों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा नहीं करना चाहता। खडसे साहेब हमारे वरिष्ठ नेता हैं। इसलिए, मैं उनकी आलोचना या उन पर टिप्पणी नहीं करूंगा।’’
खडसे, फडणवीस सरकार में राजस्व मंत्री थे। उन्होंने अंडरवर्ल्ड सरगना दाऊद इब्राहिम के कराची आवास से कॉल आने और जमीन कब्जा करने के आरोपों का सामना किया था।
मनीष भांगले नाम के एक हैकर ने उस वक्त दावा किया था कि खडसे को दाऊद के कॉल आये हैं।
महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता फडणवीस ने कहा कि खडसे को भांगले से जुड़े विषय में इस्तीफा नहीं देना पड़ा और इसके बजाय मामले में उन्हें 12 घंटे के अंदर क्लीन चिट दी गई।
उन्होंने कहा, ‘‘खडसे को जमीन कब्जा करने के मामले में इस्तीफा देना पड़ा था। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने एक न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक समिति गठित की थी। खडसे ने खुद इसकी मांग की थी।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)