देश की खबरें | नवजात बालकों में ‘हाइपोस्पेडिया’ आम समस्या, सर्जरी से ठीक किया जा सकता है : विशेषज्ञ

नयी दिल्ली, नौ फरवरी हरियाणा में गुरुग्राम निवासी नीलम ने एक अस्पताल में एक स्वस्थ लड़के को जन्म दिया, लेकिन चिकित्सकों ने पाया कि बच्चे की मूत्र नली सामान्य नहीं थी और उन्होंने इसकी जानकारी उसकी मां को दी।

चिंतित माता-पिता को एक बाल रोग विशेषज्ञ के पास भेजा गया जिन्होंने बच्चे की शारीरिक जांच करने के बाद उन्हें बताया कि वह ‘हाइपोस्पेडिया’ से पीड़ित है। ‘हाइपोस्पेडिया’ से आशय नवजात बालकों में मौजूद एक लिंग दोष से है जिसके तहत मूत्र नली (मूत्रमार्ग) के खुलने का स्थान लिंग की नोक से बहुत पहले होता है।

‘हाइपोस्पेडिया फाउंडेशन’ के अनुसार, भारत में लगभग एक लाख लड़के इस प्रकार की विसंगति के साथ जन्म लेते हैं। इस संख्या की गणना 2011 की जनगणना के अनुसार नवजात बालकों के जन्मदर से की गई है। यह भी बताया गया कि वैश्विक स्तर पर 150 में से एक नवजात बच्चे के हाइपोस्पेडिया से पीड़ित होने की संभावना रहती है।

नली के खुलने का स्थान गलत जगह स्थिति होने के अलावा चमड़ी अक्सर नीचे की ओर अविकसित होती है, जिससे शीर्ष पर काफी उभार प्रतीत होता है।

कभी-कभी बच्चों का जननांग नीचे की ओर झुका हुआ (कॉर्डी) भी हो सकता है, आमतौर पर तंग त्वचा के कारण ऐसा होता है। हालांकि, यह जननांग की संरचना में असामान्यता के कारण भी हो सकता है।

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में बाल चिकित्सा सर्जरी के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. प्रबुद्ध गोयल ने कहा कि हाइपोस्पेडिया का उपचार स्थिति की गंभीरता पर निर्भर करता है।

कभी-कभी यह सुनिश्चित करने के लिए बच्चे की मूत्र नली की जांच करने की आवश्यकता होती है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कोई अन्य समस्या तो नहीं है, खासकर जब असामान्यता अधिक गंभीर हो।

गोयल ने कहा, ‘‘जब तक की समस्या बहुत हल्की न हो, हाइपोस्पेडिया को आमतौर पर सर्जरी द्वारा ठीक किया जाता है ताकि मूत्रमार्ग के खुलने के स्थान को बच्चे के जननांग की नोक तक ले जाया जा सके और पहले से मौजूद छिद्र को बंद किया जा सके। इससे बच्चे को खड़े होकर और सीधी धारा के साथ पेशाब करने में मदद मिलेगी। यह मोड़ को भी सही करेगा ताकि बालक का जननांग सीधा और सामान्य दिखे।’’

गोयल ने कहा कि उपचार से संबंधित सर्जरी की उम्र आमतौर पर छह से 18 महीने तक होती है।

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