देश की खबरें | साईबाबा मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले को मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. माओवादियों से कथित संबंध रखने के मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के पूर्व प्राध्यापक जी. एन. साईबाबा को बरी करने के उच्च न्यायालय के आदेश को निलंबित करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले पर शनिवार को मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक वर्ग और वाम दल से जुड़े एक संगठन ने निराशा जताई। साथ ही, उन्होंने उपचार के लिए साईबाबा को जमानत दिये जाने का अनुरोध किया।
नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर माओवादियों से कथित संबंध रखने के मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के पूर्व प्राध्यापक जी. एन. साईबाबा को बरी करने के उच्च न्यायालय के आदेश को निलंबित करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले पर शनिवार को मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक वर्ग और वाम दल से जुड़े एक संगठन ने निराशा जताई। साथ ही, उन्होंने उपचार के लिए साईबाबा को जमानत दिये जाने का अनुरोध किया।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने यहां डीयू की आर्ट्स फैकल्टी में प्रदर्शन किया और साईबाबा की रिहाई की मांग की।
संगठन ने प्रदर्शन में भाग लेने वाले छात्रों और शिक्षकों से निपटने में पुलिस पर सख्ती बरतने का भी आरोप लगाया।
हालांकि, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शीर्ष न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह उन पुलिसकर्मियों के परिवारों को राहत मुहैया करेगा, जो नक्सली हमलों में शहीद हो गये हैं।
शीर्ष न्यायालय ने माओवादियों से कथित संबंध रखने के मामले में साईबाबा और अन्य को बरी करने के बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को शनिवार को निलंबित कर दिया।
शीर्ष न्यायालय ने साईबाबा के उनकी शारीरिक अशक्तता तथा स्वास्थ्य स्थिति के कारण उन्हें जेल से रिहा करने तथा घर में नजरबंद करने के अनुरोध को खारिज कर दिया।
‘नेशनल प्लेटफॉर्म फॉर द राइट्स ऑफ द डिसेब्ल्ड’ (एनपीआरडी) के महासचिव मुरलीधरन ने कहा, ‘‘गुरमीत राम रहीम जैसे हत्यारों और बलात्कारियों को किसी न किसी बहाने हर कुछ महीने पर पैरोल दिया जाता है।’’
उन्होंने पीटीआई- से कहा, ‘‘यह (शीर्ष न्यायालय का फैसला) एक झटका है और बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। जहां तक साईबाबा की बात है, उनके बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए अदालत को इलाज के लिए उन्हें जमानत देनी चाहिए।’’
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