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हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश का कहर, भूस्खलन से कई सड़कें अवरुद्ध, IMD ने बुधवार के लिए जारी किया अलर्ट

हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में बुधवार को भारी बारिश का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है और छह जुलाई तक पहाड़ी राज्य में बारिश का अनुमान जताया गया है.

हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश का कहर, भूस्खलन से कई सड़कें अवरुद्ध, IMD ने बुधवार के लिए जारी किया अलर्ट
Representational Image | PTI

शिमला, 30 जून: हिमाचल प्रदेश में सोमवार को भारी बारिश के कारण कुछ इमारतें ढह गईं, कई इलाकों में भूस्खलन हुआ और सड़कें अवरुद्ध हो गईं. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, भारी बारिश के कारण बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन के कारण मंडी में 129 और सिरमौर जिले में 92 सहित राज्य में 259 सड़कें बंद हो गईं तथा 614 ट्रांसफार्मर और 130 जलापूर्ति योजनाएं बाधित हो गईं. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, 20 जून को मानसून के आगमन के बाद से अब तक राज्य में वर्षाजनित घटनाओं में 23 लोगों की मौत हो चुकी है.

हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में बुधवार को भारी बारिश का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है और छह जुलाई तक पहाड़ी राज्य में बारिश का अनुमान जताया गया है.

हिमाचल में जून में औसत 135 मिलीमीटर बारिश हुई जबकि सामान्य रूप से 101 मिलीमीटर बारिश होती है. यहां 1901 के बाद से राज्य में जून के महीने में 21वीं बार सबसे अधिक बारिश है. राज्य में 1971 में सबसे अधिक 252.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी. मानसून की तैयारियों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने पर्यटकों और निवासियों से मौसम संबंधी सलाह का पालन करने और नदियों और झरनों के पास जाने से बचने का आग्रह किया तथा राज्य भर के उपसंभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को सतर्क रहने का निर्देश दिया.

सोमवार को सुबह शिमला के उपनगरीय क्षेत्र भट्टाकुफर में एक पांच मंजिला इमारत ढह गई वहीं रामपुर के सिकासेरी गांव में बादल फटने से एक बाड़े से कई मवेशी बह गए. चमियाना सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की ओर जाने वाले रास्ते पर स्थित माथू कॉलोनी की ये इमारत ढह गई. हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ, क्योंकि जिला प्रशासन ने गंभीर खतरे को भांपते हुए पहले ही इमारत खाली करवा ली थी. पास की दो अन्य इमारतों पर भी खतरा बना हुआ है.

इमारत की मालकिन रंजना वर्मा ने बताया, "शनिवार की बारिश के बाद जमीन खिसक रही थी, इसलिए हमने रविवार रात को ही इमारत खाली कर दी थी. सोमवार सुबह करीब सवा आठ बजे इमारत ढह गई." उन्होंने यह भी कहा कि पास में बन रही चार लेन वाली सड़क के निर्माण से इमारत कमजोर हो गई थी, लेकिन उसकी सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया.

चमियाना ग्राम पंचायत के उपप्रधान यशपाल वर्मा के अनुसार पिछले वर्ष भवन में दरारें आ गई थीं, लेकिन कैथलीघाट-ढली चार लेन वाली सड़क का निर्माण कर रही कंपनी के अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि भवन सुरक्षित है. वर्मा ने बताया कि पंचायत ने कंपनी को काम रोकने के लिए कहा था क्योंकि इससे इमारतें असुरक्षित हो रही थीं. लेकिन, उन्होंने निर्माण कार्य जारी रखा, जिसके कारण इमारत ढह गई. उन्होंने कहा, "निर्माण कंपनी की लापरवाही के कारण इमारत ढह गई."

बिलापुर जिले के कुन्हमुंझवाड़ इलाके में स्थित सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पानी घुस गया और स्कूल के 130 से ज़्यादा छात्रों को घर भेज दिया गया. स्थानीय लोगों ने बताया कि स्कूल पहले से ही खस्ताहाल था और बारिश ने स्थिति को और भी बदतर बना दिया. इस बीच, रामपुर के सरपारा ग्राम पंचायत के सिकासेरी गांव में बादल फटने से दो गौशालाएं, तीन गायें और दो बछड़े, एक रसोई और एक कमरा बह गया. यह घर राजिंदर कुमार, विनोद कुमार और गोपाल का था, जो पलास राम के बेटे हैं. इस घटना में जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ.

पिछले वर्ष जुलाई में सरपारा पंचायत के समेज में बादल फटने से 21 लोगों की जान चली गई थी. इस बीच, लगातार हो रही बारिश के कारण शिमला-चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर पांच जगहों पर भूस्खलन होने के कारण यातायात को एक ही लेन पर मोड़ा गया, जिससे जाम लग गया.

सोलन जिले के कोटी के पास चक्की मोड़ पर भी राजमार्ग पर यही स्थिति रही, वहां भी सड़क पर पत्थर गिरने के कारण यातायात बाधित हो गया और यात्रियों को एक लेन से धीमी गति से वाहन चलाने को मजबूर होना पड़ा.

सोलन के डेलगी में भूस्खलन के कारण सुबाथू-वाकनाघाट मार्ग भी बंद हो गया. अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन सड़क को साफ करने में जुटा है. उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा ने चक्की मोड़ का निरीक्षण किया तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को निर्देश दिए कि वे बारिश के दौरान इस स्थान पर यातायात अवरोध से बचने के लिए आवश्यक उपकरण और मशीनरी की चौबीसों घंटे तैनाती करें.

मौसम विभाग ने सोमवार सुबह चेतावनी दी कि अगले 24 घंटों में चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों के कुछ हिस्सों में मध्यम से तेज बाढ़ आने का खतरा है.

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(The above story first appeared on LatestLY on Jun 30, 2025 10:54 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).