देश की खबरें | हेमंत सोरेन संबंधी याचिका के सुनवाई योग्य होने को लेकर फैसला करे उच्च न्यायालय: उच्चतम न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने झारखंड उच्च न्यायालय से मंगलवार को कहा कि वह उस जनहित याचिका के सुनवाई योग्य होने संबंधी प्रारंभिक आपत्तियों पर पहले सुनवाई करे, जिसमें झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के परिवार के सदस्यों और सहयोगियों द्वारा कथित रूप से संचालित कुछ छद्म कंपनियों के लेन-देन एवं खनन पट्टे आवंटित करने में कथित अनियमितताओं के मामले में सोरेन के खिलाफ जांच का अनुरोध किया गया है।

नयी दिल्ली, 24 मई उच्चतम न्यायालय ने झारखंड उच्च न्यायालय से मंगलवार को कहा कि वह उस जनहित याचिका के सुनवाई योग्य होने संबंधी प्रारंभिक आपत्तियों पर पहले सुनवाई करे, जिसमें झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के परिवार के सदस्यों और सहयोगियों द्वारा कथित रूप से संचालित कुछ छद्म कंपनियों के लेन-देन एवं खनन पट्टे आवंटित करने में कथित अनियमितताओं के मामले में सोरेन के खिलाफ जांच का अनुरोध किया गया है।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने 13 मई के अपने आदेश में खुद कहा था कि वह पहले इस बात पर विचार करेगा कि शिव कुमार शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं और फिर वह याचिका में लगाए गए आरोपों के गुण-दोष पर गौर करेगा।

पीठ ने कहा, ‘‘हमारा विचार है कि उच्च न्यायालय रिट याचिका के सुनवाई योग्य होने पर प्रारंभिक आपत्तियों को लेकर पहले विचार करेगा और फिर कानून के अनुसार आगे बढ़ेगा।’’

शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की है और न ही याचिका में लगाए गए आरोपों पर कोई टिप्पणी की है।

उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ झारखंड सरकार ने शीर्ष अदालत का रुख किया है।

झारखंड सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शुरुआत में कहा कि जनहित याचिकाकर्ता शर्मा ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया है कि वह मुख्यमंत्री के खिलाफ अनेक जनहित याचिकाएं दाखिल करते रहे हैं।

सिब्बल ने जनहित याचिकाओं को लेकर झारखंड उच्च न्यायालय के 2010 के नियमों का उल्लेख किया और कहा कि उच्च न्यायालय को शर्मा की इस याचिका पर विचार नहीं करना चाहिए क्योंकि पिछली याचिकाओं के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी गयी है। लेकिन अदालत ने कंपनी रजिस्ट्रार और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय को प्रतिवादी बनाने का आदेश दिया।

सिब्बल ने कहा कि 17 मई को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शर्मा की जनहित याचिका पर सीलबंद हलफनामा दाखिल किया था।

पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय भले ही मानता हो कि याचिकाकर्ता प्रामाणिक नहीं है, फिर भी वह मामले का स्वत: संज्ञान ले सकता है।

ईडी और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुछ टिप्पणियां की गई हैं लेकिन ईडी द्वारा एक हलफनामा दायर किया गया है क्योंकि 2012 में दर्ज कुछ अन्य प्राथमिकियों के तहत छापेमारी के दौरान कुछ सामग्री मिली है जो जनहित याचिका की विषय-वस्तु है।

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