देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने नैतिक आयोग से उपाध्यक्ष सुधांशु मित्तल को हटाने के आईओए अध्यक्ष के निर्णय पर रोक लगाई
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) के अध्यक्ष नरेंद्र ध्रुव बत्रा के उस आदेश पर शुक्रवार को रोक लगा दी जिसके जरिए उन्होंने नैतिक आयोग से इसके उपाध्यक्ष सुधांशु मित्तल और अन्य लोगों को विभिन्न पदों से हटा दिया था।
नयी दिल्ली, 12 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) के अध्यक्ष नरेंद्र ध्रुव बत्रा के उस आदेश पर शुक्रवार को रोक लगा दी जिसके जरिए उन्होंने नैतिक आयोग से इसके उपाध्यक्ष सुधांशु मित्तल और अन्य लोगों को विभिन्न पदों से हटा दिया था।
न्यायमूर्ति सी हरिशंकर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश पारित किया और बत्रा के 19 मई के आदेश पर रोक लगा दी तथा याचिका पर खेल एवं युवा मामलों के मंत्रालय, आईओए तथा इसके अध्यक्ष से जवाब मांगा।
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बत्रा ने 2017 में गठित नैतिक आयोग को अपने आदेश के जरिए भंग कर दिया था और इसके सभी सदस्यों को हटा दिया था। आयोग विवाद समाधान का कार्य करता है और सेवानिवृत्त न्यायाधीश इसका नेतृत्व करते हैं।
याचिका में कहा गया कि मित्तल के अतिरिक्त आयोग के अन्य सदस्यों में शामिल उच्च न्यायालयल के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों तथा वरिष्ठ लोकसेवकों को भी 19 मई को इसी तरह के नोटिस मिले थे।
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मित्तल ने नैतिक आयोग और मध्यस्थता आयोग के सदस्यों को हटाने से जुड़े आईओए अध्यक्ष के 19 और 25 मई के निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
अधिवक्ता अंकुर चावला और अधिवक्ता जयंत मोहन के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया कि अध्यक्ष की कार्रवाई एकतरफा और मनमानीपूर्ण है तथा आदेश कानून के नजरिए से ठीक नहीं है क्योंकि बत्रा को आईओए के नियमों के तहत न तो किसी नियुक्ति, न किसी को हटाने और न ही आयोगों के पुनर्गठन की शक्ति है।
याचिका में दावा किया गया कि अध्यक्ष ने अपनी एकतरफा और मनमानीपूर्ण कार्रवाई से न सिर्फ आयोग के समक्ष लंबित शिकायतों को निपटाने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप की कोशिश की है, बल्कि जानबूझकर सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को अपमानित भी किया है।
याचिका में कहा गया कि बत्रा ने नैतिक आयोग के सदस्यों को सूचित किया कि उनका कार्यकाल खत्म हो गया है, जबकि आईओए नैतिक आयोग के सदस्य चार साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किए जाते हैं जिन्हें आयोग के दो तिहाई सदस्यों द्वारा ही हटाया जा सकता है और बाद में इसकी अभिपुष्टि आईओए की कार्यकारी परिषद को करनी होती है।
याचिका में दोनों आदेशों को निरस्त करने के साथ ही अध्यक्ष को पहले से ही काम कर रहे आयोगों के कामकाज में हस्तक्षेप करने से रोकने का आग्रह किया गया।
भारतीय ओलम्पिक संघ के नैतिक आयोग के सदस्य नियुक्त किए गए मित्तल को संघ की जनरल बॉडी द्वारा इसका उपाध्यक्ष भी निर्वाचित किया गया है।
याचिका आईओए के भीतर मतभेदों के बीच आई है। मित्तल ने बत्रा के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (एफआईएच) को शिकायत कर उनपर अनियमितता के आरोप लगाए हैं। एफआईएच ने हालांकि शुक्रवार को बत्रा के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से मना कर दिया और कहा कि उन्होंने 2016 में अपने निर्वाचन के दौरान उसके नियमों का उल्लंघन नहीं किया।
बत्रा ने यह भी दोहराया कि उन्होंने आईओए और एफआईएच दोनों के अध्यक्ष के रूप में अपने निर्वाचन के दौरान कुछ भी गलत नहीं किया।
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