देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने पासपोर्ट आवेदन में आपराधिक मामले छिपाने के आरोप वाली याचिका पर मंत्री को नोटिस भेजा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बंबई उच्च न्यायालय ने एक पूर्व विधान परिषद सदस्य की याचिका पर महाराष्ट्र के मंत्री विजय वडेट्टीवार को नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस नेता ने नागपुर में पासपोर्ट के लिए दो बार आवेदन देते समय अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं किया।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नागपुर, 18 जुलाई बंबई उच्च न्यायालय ने एक पूर्व विधान परिषद सदस्य की याचिका पर महाराष्ट्र के मंत्री विजय वडेट्टीवार को नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस नेता ने नागपुर में पासपोर्ट के लिए दो बार आवेदन देते समय अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं किया।

उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने मंत्री के अलावा राज्य के गृह विभाग, नागपुर पुलिस आयुक्त और नागपुर तथा मुंबई में पासपोर्ट कार्यालयों को भी शुक्रवार को नोटिस जारी किए।

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पूर्व एमएलसी मितेश बांगड़िया ने अपनी याचिका में मांग की कि इस संबंध में मंत्री के खिलाफ मामला दर्ज किया जाए और उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया जाए।

चंद्रपुर जिले में ब्रह्मपुरी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले वडेट्टीवार राज्य की एमवीए सरकार में राहत एवं पुनर्वास मंत्री हैं।

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याचिकाकर्ता ने अपने वकील श्रीरंग भंडारकर के जरिए कहा कि जब वडेट्टीवार ने पहली बार मई 2001 में नागपुर में पासपोर्ट के लिए आवेदन दिया था तो उन्होंने जानबूझकर अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं किया। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उस समय वडेट्टीवार के खिलाफ 10 से अधिक आपराधिक मामले लंबित थे।

याचिकाकर्ता ने कहा कि वडेट्टीवार ने पासपोर्ट हासिल करने के लिए अधिकारियों को गुमराह करने के मकसद से आवश्यक सूचना जानबूझकर छिपाई और झूठी सूचना दी कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है।

पूर्व विधान पार्षद ने यह भी कहा कि वडेट्टीवार ने जनवरी 2007 में दूसरी बार नागपुर में पासपोर्ट के लिए आवेदन दिया था लेकिन पासपोर्ट जारी करने के लिए पूर्व में दिए आवेदन का खुलासा नहीं किया जबकि वह नियमों के मुताबिक यह जानकारी देने के लिए बाध्य थे।

याचिका में कहा गया है कि दूसरे आवेदन में भी उन्होंने अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं किया और पासपोर्ट अधिकारियों को गुमराह किया।

न्यायमूर्ति ए एस चंदुरकर और न्यायमूर्ति अमित बोरकर की खंडपीठ ने नोटिस जारी कर चार हफ्तों में जवाब मांगा है।

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