देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने अशोक अरोड़ा को निलंबित करने के एससीबीए के निर्णय पर रोक लगाने से इनकार किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन (एससीबीए) के सचिव अशोक अरोड़ा को पद से निलंबित करने के संगठन के निर्णय पर मंगलवार को रोक लगाने से इनकार कर दिया।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, छह अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन (एससीबीए) के सचिव अशोक अरोड़ा को पद से निलंबित करने के संगठन के निर्णय पर मंगलवार को रोक लगाने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने आदेश सुनाते हुए कहा, ‘‘प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता।’’

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अंतरिम आदेश अरोड़ा की उस याचिका पर दिया गया जिसमें उन्होंने अपने निलंबन को इस आधार पर चुनौती दी थी कि एससीबीए की कार्यकारी समिति द्वारा उन्हें पद से हटाया जाना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

एससीबीए ने पूर्व में अदालत से कहा था कि अरोड़ा को निलंबित करने से पहले नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया गया।

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इसने दावा किया कि संगठन के कामकाज को नियंत्रण में लेने की कोशिश की गई जिसके बाद अरोड़ा को निलंबित करने की आवश्यकता उत्पन्न हुई।

एससीबीए की कार्यकारी समिति ने गत आठ मई को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई बैठक में अरोड़ा को सचिव पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया था।

अरोड़ा का निलंबन उस घटनाक्रम के एक दिन बाद हुआ जब उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे को एससीबीए के अध्यक्ष पद से हटाने पर चर्चा करने के लिए वकीलों की इकाई की 11 मई को ईजीएम की आपात बैठक बुलाई।

एससीबीए के एक अधिकारी ने कहा था कि कार्यकारी समिति ने इस प्रस्तावित बैठक को भी रद्द कर दिया था और अरोड़ा के खिलाफ आरोपों को देखने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की थी।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने अरोड़ा को निलंबित करने के आठ मई के कार्यकारी समिति के निर्णय पर 10 मई को रोक लगा दी थी और उनके निलंबन को ‘‘अवैध, अलोकतांत्रिक तथा मनमाना’’ निर्णय करार दिया था।

अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन-2020 में न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा (अब सेवानिवृत्त) की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में टिप्पणियों को लेकर वकीलों की इकाई द्वारा अपनाए गए रुख पर एससीबीए के शीर्ष पदाधिकारियों के बीच मतभेद उभरकर सामने आए थे।

बीसीआई ने अदालत से कहा था कि वकीलों की शीर्ष इकाई एससीबीए के निर्णय पर पहले ही रोक लगा चुकी है, लेकिन संगठन इससे सहमत नहीं है।

मुख्य वाद छह नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

न्यायमूर्ति मिश्रा के बयान पर नाराजगी जताते हुए 25 फरवरी को संगठन के कई सदस्यों के कथित हस्ताक्षर वाला ‘‘प्रस्ताव’’ दवे द्वारा जारी किए जाने के तुरंत बाद अरोड़ा ने दावा किया था कि ‘‘कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ है’’ क्योंकि उन्होंने मीडिया को जारी बयान पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

उन्होंने कहा था कि अध्यक्ष ने मनमाना और गैर-जिम्मेदार रुख अपनाया है।

न्यायमूर्ति मिश्रा ने 22 फरवरी को न्यायिक सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें बहुमुखी प्रतिभा का ऐसा धनी व्यक्ति बताया था, जो वैश्विक स्तर पर सोचते हुए स्थानीय स्तर पर काम करता है।

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