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केरल में शराब दुकानों की संख्या बढ़ाने के खिलाफ सुधीरन की याचिका सुनने को उच्च न्यायालय तैयार

केरल उच्च न्यायालय राज्य में आबकारी आयुक्तालय और बेवरेजेज कॉरपोरेशन (बेवको) के सुझाव के अनुसार शराब की दुकानों की संख्या बढ़ाने के खिलाफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी. एम. सुधीरन की याचिका पर सुनवाई के लिए मंगलवार को राजी हो गया.

केरल में शराब दुकानों की संख्या बढ़ाने के खिलाफ सुधीरन की याचिका सुनने को उच्च न्यायालय तैयार
केरल उच्च न्यायालय (Photo Credits- Twitter)

कोच्चि, 23 नवंबर : केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) राज्य में आबकारी आयुक्तालय और बेवरेजेज कॉरपोरेशन (बेवको) के सुझाव के अनुसार शराब की दुकानों की संख्या बढ़ाने के खिलाफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी. एम. सुधीरन की याचिका पर सुनवाई के लिए मंगलवार को राजी हो गया. न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन ने उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री से कहा कि वह सुधीरन की पुनरीक्षण याचिका पंजीकृत करे और इसे 25 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करे. आबकारी आयुक्तालय की ओर से वरिष्ठ सरकारी अधिवक्ता एस कन्नन ने संक्षिप्त सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि राज्य में शराब की दुकानों का संचालन करने वाले बेवको और कंज्यूमरफेड को ग्राहकों के लिए पार्किंग क्षेत्र और ‘वॉक-इन’ विकल्प जैसी अधिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए ‘सख्त’ निर्देश दिए गए हैं. आबकारी आयुक्तालय द्वारा दाखिल एक बयान में कहा गया है कि 175 और आउटलेट स्थापित करने के बेवको के अनुरोध पर भी सरकार विचार कर रही है.

अदालत ने बयान पर गौर करने के बाद कहा कि पार्किंग क्षेत्रों के अलावा, सार्वजनिक मूत्रालय भी उपलब्ध कराए जाने चाहिए, क्योंकि इन दुकानों से शराब खरीदने के लिए कतार में खड़े लोग अक्सर सड़क के किनारे पेशाब करते पाए जाते हैं, जिससे महिलाओं और बच्चों का वहां से गुजरना मुश्किल हो जाता है. न्यायमूर्ति रामचंद्रन ने कहा, ‘‘मैं आपके (सरकार) द्वारा उठाए गए कदमों से चिंतित नहीं हूं, मुझे केवल परिणाम चाहिए. मैं इस बात से अधिक चिंतित हूं कि जो लोग शराब नहीं पीते हैं, या महिलाओं और बच्चों को परेशानी नहीं होनी चाहिए.’’ सुधीरन ने अधिवक्ता कलीस्वरम राज के माध्यम से दायर याचिका में दावा किया है कि शराब की दुकानों की संख्या बढ़ने से जनता की परेशानी बढ़ेगी. राज्य में शराब की 175 और दुकानें बढ़ाने का सुझाव गत नौ नवंबर को उस अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया था, जिसमें 2017 के फैसले पर अमल नहीं करने की शिकायत की गयी थी. यह भी पढ़ें : Jharkhand: धनबाद में पुल से गिरी तेज रफ्तार कार, एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत

उक्त फैसले में राज्य सरकार और बेवको को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था कि बेवको आउटलेट के कारण त्रिशूर के एक क्षेत्र के व्यवसायों और निवासियों को कोई बाधा और परेशानी नहीं हो. सुधीरन ने अपनी याचिका में दावा किया है कि 2017 के उच्च न्यायालय के फैसले और अवमानना याचिका में उसके बाद के आदेश का उद्देश्य शराब की दुकानों के बाहर कतारों को कम करना था, न कि उनकी संख्या बढ़ाना. आबकारी आयुक्तालय और सरकार द्वारा संचालित बेवको ने नौ नवंबर को अदालत को बताया था कि अधिक दुकानों को मंजूरी देने से मौजूदा 306 लाइसेंस प्राप्त शराब की दुकानों पर दबाव कम हो सकता है.उन्होंने कहा था कि केरल में जहां 1.12 लाख लोगों के लिए केवल एक शराब की दुकान थी, वहीं पड़ोसी राज्यों- तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह अनुपात बहुत कम था, क्योंकि वहां हजारों दुकानें थीं जो शराब बेचती थीं.

(The above story first appeared on LatestLY on Nov 23, 2021 05:10 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).