देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने दिल्ली वक्फ बोर्ड की याचिका पर केंद्र को जवाब दाखिल करने का समय प्रदान किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र को दिल्ली वक्फ बोर्ड की उस याचिका पर अपना रुख बताने के लिए समय दिया, जिसमें सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना से प्रभावित होने वाली उसकी विरासत संपत्तियों के संरक्षण की मांग की गई है।
नयी दिल्ली, छह सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र को दिल्ली वक्फ बोर्ड की उस याचिका पर अपना रुख बताने के लिए समय दिया, जिसमें सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना से प्रभावित होने वाली उसकी विरासत संपत्तियों के संरक्षण की मांग की गई है।
न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने कहा कि 2021 में दायर की गई याचिका पर आज तक केंद्र सरकार की ओर से रिकॉर्ड पर कोई बयान नहीं आया है।
केंद्र सरकार के वकील ने कहा कि संपत्तियों से संबंधित ‘‘कुछ भी नहीं हो रहा है’’ और आगे के निर्देश लेने के लिए अदालत से समय मांगा।
न्यायाधीश ने केंद्र के वकील से कहा कि इसका कोई ठोस अर्थ नहीं है कि कुछ हुआ है या होने की संभावना है।
अदालत ने मामले को आठ दिसंबर को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया और याचिकाकर्ता के वकील से निर्देश लेने को कहा, क्योंकि उन्होंने कहा था कि उन्हें वक्फ संपत्तियों की स्थिति के बारे में जानकारी नहीं है।
दिल्ली वक्फ बोर्ड ने याचिका में उस क्षेत्र में अपनी छह संपत्तियों के संरक्षण का अनुरोध किया है, जहां पुनर्विकास कार्य चल रहा है, जिनमें मानसिंह रोड पर मस्जिद जब्ता गंज, रेड क्रॉस रोड पर जामा मस्जिद, उद्योग भवन के पास मस्जिद सुनहरी बाग, मोती लाल नेहरू मार्ग के पीछे मजार सुनहरी बाग रोड, कृषि भवन परिसर में मौजूद मस्जिद और भारत के उपराष्ट्रपति के आधिकारिक निवास पर स्थित मस्जिद शामिल है।
यह दावा करते हुए कि छह संपत्तियां ‘‘एक सामान्य मस्जिद से कहीं अधिक हैं और उनके साथ एक विशिष्टता जुड़ी हुई है’’, याचिका में कहा गया है कि न तो ब्रिटिश सरकार और न ही भारत सरकार ने इन संपत्तियों में धार्मिक प्रथाओं के पालन में कभी कोई बाधा पैदा की। ये हमेशा से संरक्षित थीं।
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