देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने गार्गी कॉलेज यौन उत्पीड़न मामले के बंद होने की संभावना पर असहजता जताई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने फरवरी 2020 में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के गार्गी कॉलेज में एक सांस्कृतिक उत्सव के दौरान छात्राओं के कथित यौन उत्पीड़न का एक मामला बंद किए जाने की संभावना को लेकर ‘असहजता’ जताई है।

नयी दिल्ली, 22 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने फरवरी 2020 में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के गार्गी कॉलेज में एक सांस्कृतिक उत्सव के दौरान छात्राओं के कथित यौन उत्पीड़न का एक मामला बंद किए जाने की संभावना को लेकर ‘असहजता’ जताई है।

पुलिस ने मामले में निचली अदालत के समक्ष ‘अनट्रेस्ड रिपोर्ट’ दाखिल की है। यह प्रक्रिया तब की जाती है, जब आरोपी जांच में शामिल नहीं होता है, या पुलिस मामले में आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाती है।

उच्च न्यायालय ने कहा कि कुछ व्यक्तियों को हिरासत में लिए जाने और फिर उन्हें रिहा करने के संबंध में मीडिया में आई खबर के बाद एक व्यापक कार्रवाई की आवश्यकता है। अदालत ने संबंधित पुलिस उपायुक्त को यौन उत्पीड़न की कथित घटना के सिलसिले में दर्ज आपराधिक मामले को व्यक्तिगत रूप से देखने और उसकी जांच की निगरानी करने को कहा।

पुलिस ने उच्च न्यायालय को बताया कि कोई भी गवाह बयान देने के लिए नहीं आया।

अदालत ने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसी को पीड़ितों और गवाहों में विश्वास पैदा करना चाहिए और घटना के बारे में आवश्यक खुलासा करने के लिए आगे आने में उनकी सहायता करनी चाहिए।

यह आदेश 17 अगस्त को पारित किया गया था, जो उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर मंगलवार को उपलब्ध किया गया।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ ने पांच पन्नों के अपने आदेश में कहा, ‘‘जांच को मजबूत करने और गवाहों की सुरक्षा के लिए गवाह संरक्षण योजना, 2018 का लाभ उठाया जाना चाहिए। सभी उपलब्ध फुटेज, खासकर वाहनों को पकड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फुटेज की जांच करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि घटना में उनकी (वाहनों की) महत्वपूर्ण भूमिका की ओर इशारा करने वाले सबूत हैं।’’

अदालत ने कहा, ‘‘यह अदालत किसी भी व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराए बिना एक गंभीर मामले को बंद किए जाने की संभावना के संबंध में असहजता व्यक्त करती है।

पीठ ने कहा कि बयान देने के लिए आगे आने में गवाहों की इस झिझक को दूर करने की जरूरत है।

उच्च न्यायालय ने इस बात पर गौर किया कि रिकॉर्ड में दर्ज अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ट्रकों पर सवार होकर परिसर के पास पहुंचे थे। उसने कहा कि इस घटना में इस्तेमाल किए गए वाहनों की पहचान करने के लिए सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जाना चाहिए, ताकि अपराधियों का पता लगाया जा सके।

पुरुषों का एक समूह छह फरवरी, 2020 को 'रेवेरी' उत्सव के दौरान गार्गी कॉलेज में घुस गया था और उसने उपस्थित लोगों से कथित तौर पर छेड़छाड़, उत्पीड़न किया। लोगों ने दावा किया था कि घटना के दौरान सुरक्षा अधिकारी मूकदर्शक बने रहे।

कुछ छात्राओं ने ‘इंस्टाग्राम’ पर आपबीती सुनाई और आरोप लगाया कि सुरक्षा कर्मियों ने अनियंत्रित समूहों को काबू करने के लिए कुछ नहीं किया, जिसके बाद यह प्रकरण प्रकाश में आया।

पीठ ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि कुछ व्यक्तियों को पकड़ा गया था, लेकिन बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। उसने कहा कि गहन जांच के बिना ऐसे संभावित सुराग को नजरअंदाज करना ‘‘घोर अन्याय’’ होगा।

उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए दोतरफा दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

पीठ ने कहा, ‘‘सबसे पहले, पुलिस आयुक्त को दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति के साथ मिलकर कॉलेज के कार्यक्रमों के दौरान पुलिस की मौजूदगी और निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया जाता है। दूसरा, कॉलेज और दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षात्मक प्रोटोकॉल स्थापित करने के वास्ते पुलिस के साथ मिलकर काम करना चाहिए।’’

अदालत ने एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में, घटना की अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच कराए जाने का अनुरोध किया गया है।

सुनवाई के दौरान, दिल्ली पुलिस के वकील ने कहा कि पुलिस ने निचली अदालत के समक्ष एक ‘अनट्रेस्ड रिपोर्ट’ दाखिल की है क्योंकि एक भी छात्रा यौन उत्पीड़न के आरोपी की पहचान नहीं कर पाई।

पुलिस ने बताया कि छात्राओं ने कहा कि उनके साथ छेड़छाड़ की गई, लेकिन उनमें से कोई भी मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराने के लिए आगे नहीं आई क्योंकि वे इससे आगे बढ़ चुकी हैं और उनका परिवार भी घटना से संबंधित किसी अपराधी का पता नहीं लगाना चाहता।

दिल्ली पुलिस के वकील ने यह भी कहा कि उन्होंने कॉलेज के द्वार के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज की पड़ताल की, लेकिन यह पता नहीं चल सका कि यौन उत्पीड़न के कथित कृत्यों में कौन शामिल थे।

उच्च न्यायालय ने कहा कि चूंकि मामला साकेत में एक मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष लंबित है, इसलिए जनहित याचिका पर कोई और आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है।

पुलिस के अनुसार, भारतीय दंड संहिता की धाराओं 452 (चोट, हमला या गलत तरीके से रोकने की तैयारी के बाद परिसर में घुसना), 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला करना या आपराधिक बल प्रयोग करना), 509 (ऐसे शब्द, इशारे या कृत्य, जिनका उद्देश्य किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना हो) और 34 (साझा इरादे को पूरा करने के लिए कई व्यक्तियों द्वारा किया गया कृत्य) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\